पठानकोट सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड की खस्ता हालत: फर्श पर बैठने को मजबूर गर्भवती महिलाएं
पठानकोट, स्थानीय सिविल अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अस्पताल के जच्चा-बच्चा (गायनोलॉजी) वार्ड में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव देखने को मिल रहा है। मरीजों के बैठने के लिए रखी गई कुर्सियां टूटी पड़ी हैं, जिसके चलते यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को मजबूरन फर्श पर बैठना पड़ रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के मुख्य अंश:
- सुविधाओं का अभाव: वार्ड के बाहर और लिफ्ट के पास रखी कुर्सियां पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं। लेबर रूम के बाहर इंतज़ार कर रहे तीमारदारों और मरीजों के लिए बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
- फंड पर उठते सवाल: अस्पताल की इस दयनीय स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि रखरखाव (Maintenance) के लिए पंजाब सरकार के फंड शायद खत्म हो चुके हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या कहना है अस्पताल प्रशासन का?
इस पूरे मामले पर जब अस्पताल के एसएमओ (SMO) से बात की गई, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना पक्ष रखा:
- भारी भीड़ है कारण: एसएमओ ने बताया कि पठानकोट सिविल अस्पताल में रोजाना लगभग 1000 से 1500 मरीजों की ओपीडी (OPD) होती है। मरीजों की इस भारी संख्या के कारण कुर्सियों और अन्य सामानों में टूट-फूट (Wear and tear) होना एक आम बात है।
- जल्द होगी मरम्मत: प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि टूटी हुई कुर्सियों की मरम्मत एक या दो दिन के भीतर करवा दी जाएगी।
- मुफ्त इलाज का दावा: उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल में जच्चा-बच्चा और आपातकालीन (Emergency) सेवाएं पूरी तरह से मुफ्त हैं। दवाइयों का भी कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
एसएमओ ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी भी मरीज को अस्पताल में कोई असुविधा होती है या कोई शिकायत है, तो वे सीधे कमरा नंबर 1 में आकर उनसे संपर्क कर सकते हैं।











