माइनिंग विभाग और ट्रक चालकों में तकरार, डीएसपी सुखविंदर थापा ने संभाला मोर्चा
लदपालवां टोल प्लाजा के पास माइनिंग विभाग द्वारा वाहनों की चेकिंग के दौरान विभाग के कर्मचारियों और ट्रक चालकों के बीच तीखी बहस हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने सवाल उठाया कि जब बरसात के सीजन में माइनिंग का काम बंद है, तो यह ट्रक कहां से आ रहे हैं? मामला बढ़ता देख डीएसपी सुखविंदर थापा ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों की बात सुनी।
विस्तार:
अक्टूबर 2026 (प्राप्त जानकारी के अनुसार) को लदपालवां टोल प्लाजा के पास माइनिंग विभाग की टीम ट्रकों की चेकिंग कर रही थी। चेकिंग के दौरान कागजातों को लेकर ट्रक चालकों और माइनिंग विभाग के बीच तकरार बढ़ गई। विवाद बढ़ने पर कुछ ट्रक चालक अपने वाहन टोल प्लाजा से भगाकर ले गए। सूचना मिलते ही डीएसपी सुखविंदर थापा मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों का पक्ष सुना।
ट्रक चालकों के आरोप:
ट्रक चालकों का आरोप है कि उनके वाहन पिछले कई दिनों से रोके जा रहे हैं, जिससे उन्हें रोजाना हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। चालकों ने यह भी आरोप लगाया कि वाहनों को छुड़वाने के लिए उनसे अलग-अलग खर्चा वसूला जा रहा है, और बिना बिल के गाड़ियां पास कराने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। चालकों का कहना है कि वे पांच दिन से गाड़ियां खड़ी करने के कारण आर्थिक संकट में हैं और प्रतिदिन प्रति गाड़ी भारी हर्जाना भुगतना पड़ रहा है।
किसान यूनियन का पक्ष:
मौके पर पहुंचे पाल सिंह बैंस (पंजाब प्रधान, भारतीय किसान यूनियन ढड्डू) ने भी इस मामले में कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि माइनिंग विभाग और तथाकथित क्रशर मालिकों की मिलीभगत से अवैध उत्खनन का खेल चल रहा है। एक तरफ जहां सरकार के नियमों के तहत माइनिंग बंद है, वहीं दूसरी तरफ धड़ल्ले से ओवरलोड और बिना कागजात के ट्रक निकाले जा रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई:
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी सुखविंदर थापा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आश्वासन दिया है कि उच्च अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला लाया गया है। पुलिस ने माइनिंग विभाग की शिकायत भी ले ली है और तथ्यों के आधार पर आगामी सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।












