पठानकोट में जन्माष्टमी मेला: 75 वर्षों से सजा आ रहा है श्रद्धा और उल्लास का यह खास केंद्र
पठानकोट के रामलीला ग्राउंड में हर साल की तरह इस बार भी जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। करीब 75 वर्षों से यह ऐतिहासिक मेला शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा बना हुआ है। मेले की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एएमआई चैनल ने ग्राउंड जीरो से लिया खास जायजा।
मुख्य बिंदु (Bullet Points):
- 75 साल पुरानी परंपरा: पिछले लगभग 75 वर्षों से रामलीला ग्राउंड में जन्माष्टमी पर्व पर इस मेले का आयोजन किया जा रहा है, जो उत्तर भारत का एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है।
- झूले और खान-पान के स्टॉल: मेले में बच्चों और बड़ों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले (स्विंग्स) और लजीज व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए हैं।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम: मेले की पूरी सुरक्षा व्यवस्था सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहेगी। इसके अलावा प्रशासन और स्थानीय कमेटियों द्वारा निजी सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
- भारी भीड़ की संभावना: पिछले साल इस मेले में करीब 43,000 लोगों ने हिस्सा लिया था, और इस बार भी श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि की उम्मीद है।
पूर्व विधायक अशोक शर्मा से खास बातचीत:
मेले के संबंध में बातचीत करते हुए कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक अशोक शर्मा ने बताया कि यह मेला वृंदावन की तर्ज पर इन दिनों आयोजित किया जाता है।
- आयोजन की तिथि: इस वर्ष 4 सितंबर को जन्माष्टमी और 5 सितंबर को नंदोत्सव हर्षोल्लास के साथ इस प्रांगण में मनाया जाएगा।
- सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष जोर: पूर्व विधायक ने बताया कि मेले में आने वाले हर श्रद्धालु की सुरक्षा सर्वोपरि है। प्रशासन के सहयोग के साथ-साथ निजी कमेटियां भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में जुटी हुई हैं।
- धार्मिक आस्था का केंद्र: उन्होंने कहा कि पंजाब के साथ-साथ पूरे उत्तर भारत के लोग इस ऐतिहासिक मेले में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जिससे आपसी भाईचारा और धार्मिक सौहार्द मजबूत होता है।











