AMI News स्पेशल रिपोर्ट: नेपाल में ग्लेशियर टूटने से भीषण तबाही, 900 से अधिक मौतें; चीन के साथ डेटा शेयरिंग पर विवाद
नेपाल इस वक्त सदी की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। 26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और उसके बाद आए बाढ़ के तांडव ने भारी तबाही मचाई है। इस भयंकर आपदा में अब तक 903 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 275 भारतीयों समेत 3,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इस बीच रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने एक बड़े कूटनीतिक और तकनीकी विवाद को जन्म दे दिया है।
त्रासदी का विकराल रूप और रेस्क्यू ऑपरेशन
मध्य नेपाल से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक तबाही का मंजर दिल दहला देने वाला है। बाढ़ के कारण कई गांव, कस्बे, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। सेना और बचाव दलों द्वारा अब तक करीब 9,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला जा चुका है, लेकिन मलबे से शवों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। इस बीच, भोटेकोशी नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नया अलर्ट जारी किया है और बाढ़ प्रभावित जिलों के लोगों व बचावकर्मियों को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है।
बैठक और डेटा शेयरिंग पर नेपाल के आरोप
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विनाशकारी त्रासदी से करीब तीन महीने पहले 27 मई को काठमांडू में नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में नेपाल के 10 और तिब्बत सहित चीन के करीब एक दर्जन अधिकारी शामिल हुए थे। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन का मकसद ग्लेशियरों की शुरुआती हलचल और जलस्तर की जानकारी समय से पाना था। नेपाल का कहना है कि उसने सीमावर्ती इलाकों के मौसम और ग्लेशियरों का सटीक डेटा समय पर साझा करने की मांग की थी, लेकिन चीन की तरफ से केवल भारी बारिश का सामान्य पूर्वानुमान ही भेजा जाता है जिसमें एवलांच (हिस्खलन), जलस्तर और ग्लेशियर मूवमेंट का सटीक डेटा शामिल नहीं होता।
चीन की सफाई और दावों का खंडन
नेपाल में स्थित चीनी दूतावास ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि दोनों देश लगातार संपर्क में थे और सुदूर हिमालयी क्षेत्र की निगरानी करना बेहद कठिन है। चीन का दावा है कि उसके मौसम केंद्र ने आपदा से 12 दिन पहले ही भारी बारिश और लैंडस्लाइड की आशंका का ईमेल भेज दिया था।
भारत समेत अन्य देशों के नागरिक भी प्रभावित
इस भीषण त्रासदी में भारी संख्या में बाहरी लोग भी फंसे हैं। लापता 3,000 से अधिक लोगों में 275 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिनकी तलाश के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। बाढ़ का भयंकर रूप पड़ोसी देशों तक महसूस किया गया है।
भविष्य के लिए नेपाल की बड़ी मांग
इस कड़वे अनुभव के बाद नेपाल अब चीन के साथ एक मजबूत डेटा-शेयरिंग डील चाहता है। नेपाल का लक्ष्य चीन के साथ मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जिससे हर 10 मिनट पर नदियों के जलस्तर का रियल-टाइम डेटा मिल सके, ताकि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से समय रहते निपटा जा सके।











