प्रशासन की नींद खुली, वीआईपी मूवमेंट से ठीक पहले शुरू हुई सफाई
15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे कार्यक्रमों पर ही क्यों उठाए जाते हैं कचरे के ढेर?
“क्या आम जनता को स्वच्छ माहौल में सांस लेने का अधिकार केवल त्योहारों या स्वतंत्रता दिवस पर ही है?”
पठानकोट :शहर में स्वच्छता को लेकर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। लमिनी स्टेडियम रोड पर स्थित खड्डी पुल के पास पिछले एक साल से जमा कचरे के डंप (ढेर) को अचानक हटाना शुरू कर दिया गया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह तत्परता आम जनता की शिकायतों पर क्यों नहीं, बल्कि 15 अगस्त के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले प्रशासनिक कार्यक्रम के कारण दिखाई जा रही है?
वीआईपी के स्वागत के लिए ‘चकाचक’ करने की होड़
15 अगस्त के मौके पर लमिनी स्टेडियम में जिलाधीश (DC), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और प्रशासन के अन्य उच्च अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी। बड़े अधिकारियों का दौरा होने के कारण नगर निगम प्रशासन की नींद खुली और जेसीबी मशीनों को लगाकर रातों-रात कचरा हटाने का काम शुरू कर दिया गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि:
- एक साल से गंदगी: इस मार्ग पर पिछले एक वर्ष से कचरे के ढेरों से बदबू आ रही थी और बीमारियाँ फैलने का खतरा बना हुआ था।
- केवल दिखावा: जब वीआईपी अधिकारियों का आना होता है, तभी प्रशासन अपना चेहरा चमकाने और मुंह छुपाने के लिए सफाई अभियान चलाता है।
- जनता का सवाल: आखिर आम दिनों में शहरवासियों को इस दुर्गंध और गंदगी से राहत क्यों नहीं दी जाती?
जनता का चुभता सवाल
प्रशासन से जनता का सीधा सवाल है कि स्वच्छता अभियान क्या सिर्फ 15 अगस्त, 26 जनवरी या विशेष कार्यक्रमों तक ही सीमित है? आम दिनों में शहर की सफाई की जिम्मेदारी किसकी है?
नागरिकों ने मांग की है कि जिस तरह वीआईपी कार्यक्रमों के समय तत्परता दिखाई जाती है, उसी तरह स्थायी रूप से शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए ताकि पठानकोट वासियों को रोजमर्रा के जीवन में स्वच्छ माहौल मिल सके।












