भारी बारिश से रावी, उज्ज दरिया और जलालिया नाले उफान पर: पठानकोट के तटीय गांवों में घुसा पानी, 48 घंटों का ‘यलो अलर्ट’
पठानकोट/माधोपुर: जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों (चंबा, बसोहली और कठुआ) में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पठानकोट और आसपास के इलाकों में एक बार फिर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। रावी नदी के साथ-साथ उसकी सहायक नदियां—उज्ज दरिया और जलालिया नाला—इस समय पूरे उफान पर बह रही हैं। इनका पानी मुख्य सड़कों, खेतों और अब रिहायशी इलाकों में दाखिल हो चुका है।
मौसम विभाग ने पठानकोट, गुरदासपुर और होशियारपुर में अगले 48 घंटों के लिए तेज गरज-चमक और भारी बारिश का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया है।
1. प्रभावित इलाके और वर्तमान स्थिति
जलभराव के कारण सीमावर्ती बामियाल ब्लॉक के कई गांव पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं:
- जलमग्न गांव: बामियाल, दनवाल, कुल्लियां, मूंठी, मेहरा चक और समराला सहित आधा दर्जनों गांवों में पानी घुस चुका है।
- घरों व फसलों को नुकसान: कई घरों में घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे धान की फसल और अन्य कृषि क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंचा है।
- सड़क संपर्क ठप: जलालिया नाले का पानी बामियाल की मुख्य सड़क पर कई फीट ऊपर बह रहा है। इसके अतिरिक्त, भूस्खलन और मलबे के कारण मंडी-पठानकोट हाईवे और भरमौर-पठानकोट हाईवे पर वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी व ठप हो गई है।
2. बांधों एवं जलस्तर का ताजा हाल
- रणजीत सागर बांध: झील का जलस्तर बढ़कर 511.25\text{ मीटर} पहुंच गया है। फिलहाल बांध के मुख्य फ्लड गेट बंद हैं और बांध पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में है (खतरे का निशान 527.91\text{ से }528\text{ मीटर} है)।
- शाहपुर कंडी व माधोपुर हेडवर्क्स: शाहपुर कंडी बैराज की ओर पानी छोड़ा जा रहा है, जहां से माधोपुर हेडवर्क्स की तरफ लगभग 11,350\text{ क्यूसेक} पानी प्रवाहित किया जा रहा है।
- संगम: उज्ज और जलालिया का संयुक्त बहाव मकौड़ा पत्तन के पास रावी नदी में समाहित हो रहा है, जिससे रावी नदी का वेग और अधिक तीव्र हो गया है।
3. प्रशासन मुस्तैद, लोगों से सतर्क रहने की अपील
सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की टीमें माधोपुर हेडवर्क्स और रावी के तटबंधों (धुस्सी बांधों) पर 24 घंटे निगरानी रख रही हैं।
प्रशासनिक हिदायत: रावी नदी और चक्की खड्ड के तटीय इलाकों तथा बामियाल, भोआ सेक्टर, कठलौर/मकौड़ा पत्तन के निवासियों को पानी के पास न जाने की सख्त सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत फ्लड कंट्रोल रूम से संपर्क करने को कहा गया है।
4. ग्रामीणों का आक्रोश और अगस्त 2025 की खौफनाक यादें
पहाड़ों से जलस्तर बढ़ते ही स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। पिछले साल अगस्त 2025 में माधोपुर बैराज के 3 फ्लड गेट क्षतिग्रस्त होने से 40 से अधिक गांव जलमग्न हो गए थे और सेना व NDRF को तैनात करना पड़ा था।
ग्रामीणों का आरोप है कि पानी को नियंत्रित तरीके से थोड़ा-थोड़ा छोड़ने के बजाय अचानक भारी मात्रा में छोड़ दिया जाता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। निवासियों ने प्रशासन और जन प्रतिनिधियों से मौके का जायजा लेकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।











