अंतरिक्ष में बढ़ता कचरा: भारत के 20 उपग्रहों पर टकराने का गंभीर खतरा
लोअर अर्थ ऑर्बिट में मौजूद 22 में से 20 भारतीय उपग्रह जोखिम में, इसरो ने इस साल 9 बार बदली दिशा
नई दिल्ली: अंतरिक्ष में तेजी से बढ़ रहा कचरा (Space Debris) भारत के उपग्रहों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सरकार ने बुधवार को लोकसभा में सूचित किया कि 🌍 लोअर अर्थ ऑर्बिट (LEO) में काम कर रहे भारत के कुल 22 सक्रिय उपग्रहों में से 20 पर अंतरिक्ष मलबे से टकराने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
संसद में एक लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पृथ्वी की निचली कक्षा (2,000 किलोमीटर से कम ऊंचाई) में उपग्रहों के टकराने का जोखिम बेहद अधिक है, क्योंकि इस क्षेत्र में पुराने उपग्रहों के टुकड़े, रॉकेट के मलबे और अन्य अंतरिक्षीय वस्तुएं बहुत बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
टकराव रोकने के लिए इसरो के ‘बचाव पैंतरे’
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने उपग्रहों को इस मलबे की चपेट में आने से बचाने के लिए लगातार निगरानी रख रहा है।
- 2026 में अब तक 9 बार: इसरो ने इस साल (2026 में) अब तक उपग्रहों की दिशा में 9 बार बदलाव किया है।
- 2025 का आंकड़ा: बीते वर्ष 2025 में टकराव से बचाने के लिए ऐसी 20 गतिविधियां अंजाम दी गई थीं।
इस पूरी प्रक्रिया को ‘कोलिजन अवॉइडेंस मैन्युवर’ (Collision Avoidance Manoeuvre – CAM) कहा जाता है। यह एक पूर्व-नियोजित ऑर्बिटल एडजस्टमेंट (कक्षा का समायोजन) होता है, जिसके जरिए उपग्रह ऑपरेटर किसी अन्य वस्तु या मलबे से संभावित टक्कर को टालते हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ‘डेब्रिस फ्री’ लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंचों में सक्रिय रूप से शामिल है। भारत इंटर-एजेंसी स्पेस डेब्रिस कोऑर्डिनेशन कमेटी (IADC) जैसी वैश्विक संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इसके साथ ही, इसरो ने भविष्य के अभियानों में अंतरिक्ष में कचरा न फैलाने (Debris Free Space Mission) का लक्ष्य रखा है, ताकि भारत का अंतरिक्ष नेटवर्क सुरक्षित रह सके।











