कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बालिग नागरिकों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार, अंतर-धार्मिक विवाह को पुलिस सुरक्षा के निर्देश
कोलकाता / हावड़ा: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल पुलिस को हावड़ा में बुधवार को होने वाले एक अंतर-धार्मिक विवाह के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि विवाह बिना किसी रुकावट के संपन्न हो सके।
अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि देश के बालिग नागरिकों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार है।
क्या है पूरा मामला?
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने दो अलग-अलग धर्मों के युवक-युवती द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
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- सुरक्षा की गुहार: जोड़े ने अपनी याचिका में बताया कि अंतर-धार्मिक विवाह के फैसले के कारण उन्हें अपनी जान-माल का खतरा महसूस हो रहा है, इसलिए विवाह के दौरान पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
- अदालत की टिप्पणी: न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि यद्यपि यह मामला अंतर-धार्मिक विवाह से जुड़ा है, लेकिन अदालत को इसमें कोई कानूनी अड़चन नजर नहीं आती। याचिकाकर्ता इस देश के बालिग नागरिक हैं और उन्हें अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है।
”इस देश के बालिग नागरिकों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का पूर्ण अधिकार है।”
— न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य (कलकत्ता हाईकोर्ट)
पुलिस प्रशासन का रुख
कोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया है। हावड़ा (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक (SP) अमित वर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेशों का पूरी तरह से पालन करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और विवाह के दौरान पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात रहेगा।











