वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

पठानकोट सेवा केंद्र कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, वेतन वृद्धि और परमानेंट नौकरी को लेकर खोला मोर्चा

पठानकोट: सरकारी सेवा केंद्रों के कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

​वेतन वृद्धि और परमानेंट नौकरी की मांग को लेकर कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर; निजी कंपनियों के शोषण का लगाया आरोप।

पठानकोट,: पंजाब सरकार के दावों के विपरीत, पठानकोट जिले के सरकारी सेवा केंद्रों (Seva Kendras) में कार्यरत कर्मचारियों का गुस्सा सरकार और निजी प्रबंधन कंपनियों के खिलाफ सातवें आसमान पर पहुंच गया है। अपनी मांगों को लेकर ऑपरेटरों और कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस हड़ताल के कारण सेवा केंद्रों में आने वाली आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

​समान काम, समान वेतन की मांग

​प्रदर्शन कर रहे ऑपरेटरों का कहना है कि वे सेवा केंद्रों में सुबह से शाम तक भारी दबाव में काम करते हैं। सेवा केंद्रों में लगभग 439 प्रकार की सरकारी सेवाएं (जैसे- ट्रांसपोर्ट, असला लाइसेंस, मैरिज सर्टिफिकेट, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र आदि) जनता तक पहुंचाई जाती हैं। इसके बावजूद उन्हें मात्र 10 से 11 हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया जा रहा है, वह भी समय पर नहीं मिलता। कई बार 3 से 5 महीने की देरी से वेतन आता है। महंगाई के इस दौर में, जहां पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, इतने कम वेतन में गुजारा करना नामुमकिन हो गया है। कर्मचारियों ने मांग की है कि उनका वेतन कम से कम 40,000 रुपये किया जाए।

​प्राइवेट कंपनियों द्वारा शोषण का आरोप

​कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार और उनके बीच ठेकेदारी सिस्टम (Contract System) के तहत प्राइवेट कंपनियां शामिल हैं, जो सारा रेवेन्यू खुद रख लेती हैं। पंजाब का पैसा पंजाब से बाहर जा रहा है। एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने बताया:

​”कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट सरकार के साथ 5 साल का होता है, लेकिन हमारे साथ केवल 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है। हर 6 महीने बाद इसे रिन्यू कराने की तलवार लटकी रहती है। यदि हम आवाज उठाएं, तो नौकरी से निकालने या टर्मिनेट करने की मेल भेज दी जाती है।”

​”कहाँ गया मुख्यमंत्री का हरा पेन?”

​कर्मचारियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनका ‘हरा पेन’ हमेशा मुलाजिमों के हक में और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए चलेगा। लेकिन आज 4 साल बीत जाने के बाद भी सेवा केंद्र के कर्मचारियों के लिए वह हरा पेन कहीं नहीं चला। वर्ष 1948 का लेबर एक्ट भी आज तक सेवा केंद्रों में लागू नहीं किया गया है।

​प्रमुख मांगें:

  • ​ठेकेदारी प्रथा (Contract System) को तुरंत खत्म कर कर्मचारियों को सीधे सरकारी विभाग के अधीन लिया जाए।
  • ​’समान काम-समान वेतन’ के सिद्धांत के तहत वेतन बढ़ाकर 40,000 रुपये किया जाए।
  • ​हर 6 महीने में कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू करने की व्यवस्था बंद कर नौकरी सुरक्षित की जाए।
  • ​समय पर वेतन की अदायगी सुनिश्चित हो।

​कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक प्रशासन या सरकार उनकी इन मांगों को पूरा नहीं करती, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

Ami News
Author: Ami News

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!