बद्दी की हवा हुई ‘जहरीली’, मनाली में शुद्धता का अहसास: AQI पहुंचा 222 के पार

सोलन/बद्दी : हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। ताज़ा आंकड़ों ने स्थानीय निवासियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जहाँ एक ओर राज्य की राजधानी और पर्यटन स्थल स्वच्छ हवा का आनंद ले रहे हैं, वहीं बद्दी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 222 दर्ज किया गया है, जिसे स्वास्थ्य के लिए ‘खराब’ श्रेणी में माना जाता है।
प्रदेश के शहरों का प्रदूषण रिपोर्ट कार्ड
राज्य में वायु गुणवत्ता के आंकड़ों की तुलना करें तो औद्योगिक क्षेत्रों की स्थिति चिंताजनक है:
|
शहर |
AQI स्तर |
हवा की गुणवत्ता |
|---|---|---|
|
बद्दी |
222 |
खराब |
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पांवटा साहिब |
123 |
मध्यम |
|
मनाली |
30 |
बहुत अच्छी |

प्रदूषण के पीछे केवल फैक्ट्रियां नहीं, ये हैं मुख्य कारण:
विशेषज्ञों और प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, बद्दी की हवा बिगड़ने के पीछे कई कारण एक साथ सक्रिय हैं:
- खेती की गतिविधियां: वर्तमान में गेहूं की कटाई और थ्रैशिंग का सीजन जोरों पर है। थ्रेशर से निकलने वाली धूल और कण हवा में मिलकर प्रदूषण बढ़ा रहे हैं।
- खस्ताहाल सड़कें: शहर की टूटी सड़कों के कारण जब वाहन वहां से गुजरते हैं, तो भारी मात्रा में धूल उड़ती है जो लंबे समय तक वातावरण में बनी रहती है।
- परिवहन में लापरवाही: निर्माण सामग्री (रेत, बजरी, सीमेंट) ले जा रहे खुले वाहन और ट्रक भी धूल के स्तर को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
- औद्योगिक धुआं: फैक्ट्रियों की चिमनियों से लगातार निकलता धुआं पहले से ही एक स्थाई समस्या बना हुआ है।
प्रशासन हुआ सख्त: जारी किए गए निर्देश
प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग के अधिशासी अभियंता अभय परमार ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सड़कों की तत्काल मरम्मत और अन्य सुधारात्मक कदमों के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
“हम स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं। धूल को नियंत्रित करने के लिए संबंधित विभागों को सड़कों की मरम्मत करने और निर्माण सामग्री ढककर ले जाने जैसे नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।”
— अभय परमार, अधिशासी अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

स्वास्थ्य चेतावनी
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बद्दी जैसे क्षेत्रों में बुजुर्गों और बच्चों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि 200 से ऊपर का AQI श्वसन संबंधी बीमारियों और फेफड़ों में संक्रमण का खतरा पैदा कर सकता है।







