22 अप्रैल 2026 आज का खास दिन

आज 22 अप्रैल 2026 है। आज का दिन वैश्विक पटल से लेकर अध्यात्म की गहराई तक विशेष महत्व समेटे हुए है। जहाँ दुनिया ‘पृथ्वी दिवस’ के जरिए अपनी जड़ों की ओर लौटने का आह्वान कर रही है, वहीं भारतीय पंचांग के अनुसार आज स्कंद षष्ठी और गंगा सप्तमी के पूर्वार्ध का संगम हो रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं आज के दिन की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और धार्मिक विशिष्टता।
अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संदर्भ: ‘पृथ्वी दिवस 2026’
आज पूरा विश्व ‘अंतरराष्ट्रीय मातृ पृथ्वी दिवस’ (International Mother Earth Day) मना रहा है। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की थीम ‘Our Power, Our Planet’ (हमारी शक्ति, हमारा ग्रह) रखी गई है।
- महत्व: यह दिन जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के नुकसान और बढ़ते प्रदूषण जैसी चुनौतियों से लड़ने के लिए सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है।
- इतिहास: इसकी शुरुआत 1970 में हुई थी, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना था। आज के दिन भारत सहित दुनिया भर में वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान और ऊर्जा संरक्षण के संकल्प लिए जा रहे हैं।
- भारत का योगदान: राष्ट्रीय स्तर पर भारत ‘मिशन लाइफ’ (LiFE – Lifestyle for Environment) के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहा है, जिसमें व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण अनुकूल आदतों को अपनाने पर जोर दिया गया है।
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि: स्कंद षष्ठी और गंगा सप्तमी का आगमन
धार्मिक दृष्टि से आज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है।
- स्कंद षष्ठी: आज का दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, देवसेनापति भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित है। दक्षिण भारत में इसे ‘कंद षष्ठी’ के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखने से संतान सुख और शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है।
- गंगा सप्तमी की पदचाप: पंचांग के अनुसार, आज रात 10:49 बजे से सप्तमी तिथि लग जाएगी। हालांकि उदयातिथि के अनुसार गंगा सप्तमी (जाह्नवी सप्तमी) मुख्य रूप से कल मनाई जाएगी, लेकिन गंगा तटों पर विशेष आरती और तैयारी आज शाम से ही शुरू हो जाएगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, आज ही के दिन माँ गंगा ऋषि जह्नु के कान से पुनः प्रकट हुई थीं।

आज का पंचांग: 22 अप्रैल 2026 (बुधवार)
आज का पंचांग ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति की ओर इशारा कर रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए मिश्रित परिणाम देने वाला है।
मुख्य विवरण:
- संवत: विक्रम संवत 2083 (नल नाम संवत्सर)
- मास: वैशाख, शुक्ल पक्ष
- तिथि: षष्ठी (रात 10:49 तक, उसके बाद सप्तमी)
- नक्षत्र: आर्द्रा (सुबह 09:42 तक, फिर पुनर्वसु)
- योग: सुकर्मा योग (आज के दिन किए गए कार्य सफलता और यश दिलाते हैं)
- दिन: बुधवार (बुध ग्रह को समर्पित, व्यापार और बुद्धि के कार्यों के लिए श्रेष्ठ)
शुभ-अशुभ समय:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 से 05:15 तक।
- राहुकाल (वर्जित समय): दोपहर 12:25 से 02:00 तक। (इस दौरान शुभ कार्य टालने चाहिए)
- अभिजीत मुहूर्त: आज कोई नहीं है।
- अमृत काल: देर रात 12:56 से 02:25 (23 अप्रैल) तक।

आज की सलाह
चूंकि आज ‘पृथ्वी दिवस’ है और बुधवार का दिन बुध देव (बुद्धि के कारक) का है, इसलिए आज एक पौधा लगाना न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा होगा, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी शुभ फलदायी रहेगा। शाम के समय भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा करना पारिवारिक सुख-शांति के लिए उत्तम है।







