पठानकोट के नहर विभाग की बड़ी लापरवाही, वाटर डायवर्जन के टूटे गेट और लीपापोती की पोल खोलती धरातल की हकीकत
पठानकोट के धीरा रोड पर स्थित नहर विभाग के वाटर डायवर्जन पर बनी सुरक्षा व्यवस्था लंबे समय से बदहाली के आंसू रो रही है। स्थिति यह है कि यहां लगे गेट्स और उनके पोल की वेल्डिंग पूरी तरह से टूट चुकी है, जिस कारण वाटर गेट्स बुरी तरह से टिल्ट होकर झुक गए हैं। हैरानी की बात यह है कि नहर विभाग के अधिकारियों की इस पर नजर ही नहीं पड़ रही है और जिम्मेदार इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह से आंखें मूंदकर बैठे हैं। आगे के मुख्य तीन गेटों के भी कमोबेश यही हाल हैं, जिन्हें सुधारने के नाम पर विभाग द्वारा केवल सीमेंटेड स्ट्रीट वॉल्स लगाकर महज लीपापोती कर दी गई है।
अस्थाई तौर पर सीमेंटेड पोल लगाकर पानी के बहाव को रोकने का यह प्रयास भविष्य की किसी बड़ी आपदा को रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित होगा। आने वाले कल में अगर पानी का बहाव तेज होता है या कोई बड़ा हादसा पेश आता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी किसकी होगी? पिछली बरसातों के दौरान भी इन गेटों और बैरियर्स के टूटे होने के कारण पानी का भारी दबाव बना हुआ था, तब भी विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी गई थी और समस्या से अवगत करवाया गया था। लेकिन आज महीनों बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं और टूटे हुए बैरियर्स और गेट्स का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
जब बरसात के समय जिम्मेदार नहर विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया था, तो उनका गैर-जिम्मेदाराना जवाब सामने आया था कि “मैडम, ये तो टूटे ही नहीं हैं”। आज आम जनता और मीडिया के सामने साफ तौर पर टूटे हुए पोल्स और गेट्स की तस्वीरें सच्चाई बयां कर रही हैं, जबकि कुछ ही गेट्स किसी तरह से जुड़े हुए हैं। इस तरह के झूठे आश्वासनों और कागजी लीपापोती से आम जनता की जान-माल की सुरक्षा नहीं की जा सकती है। यदि समय रहते इन वाटर डायवर्जन गेट्स की मरम्मत और स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो यह लापरवाही पठानकोट वासियों के लिए एक बहुत बड़ी आपदा का कारण बन सकती है।










