निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर रोक के ऑर्डिनेंस को हाईकोर्ट में चुनौती
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब; अध्यादेश की टाइमिंग और आवश्यकता पर उठाए सवाल
चंडीगढ़: पंजाब सरकार द्वारा अध्यादेश जारी कर निजी स्कूलों की वार्षिक फीस वृद्धि की सीमा 8 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के फैसले के खिलाफ निजी स्कूलों की चार प्रमुख एसोसिएशनों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत में दायर याचिकाओं में फैडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशन ऑफ पंजाब, रिकॉग्नाइज्ड एफिलिएटेड स्कूल्स एसोसिएशन, इंडिपैंडैंत स्कूल्स एसोसिएशन और प्राइवेट अनएडिड स्कूल्स एसोसिएशन शामिल हैं।
’2016 और 2019 के कानूनों का उल्लंघन’
सुनवाई के दौरान एसोसिएशनों के वकीलों ने अदालत को बताया कि सरकार का यह ऑर्डिनैंस वर्ष 2016 और 2019 के संबंधित कानूनों का सीधे तौर पर उल्लंघन करता है। याचिकार्ताओं का तर्क है कि इस अध्यादेश के जरिए सरकार निजी स्कूलों से शैक्षणिक सत्र 2023-24 से अब तक का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड मांग रही है, जो अनुचित और कानून के विपरीत है। इसी आधार पर ऑर्डिनैंस को तुरंत प्रभाव से रद्द करने की मांग की गई है।
“सत्र चालू होने पर ऑर्डिनैंस लाने की क्या जल्दी थी?” > — हाईकोर्ट की टिप्पणी
सरकार की नीयत और प्रक्रिया पर सवाल
याचिकाकर्त्ताओं ने सवाल उठाया कि जब राज्य विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो चुका है, तब इस विषय को विधेयक (Bill) के रूप में सदन में प्रस्तुत किया जा सकता था। फिर सरकार ने ऑर्डिनैंस का रास्ता क्यों अपनाया?
इस पर हाईकोर्ट ने भी कड़ी टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा:
“ऑर्डिनैंस तब लाया जाता है जब विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा हो। आप यह ऑर्डिनैंस पिछले महीने लेकर आए और अब विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है। इसकी इतनी जल्दी क्या थी? क्या इसे मौजूदा सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जा रहा है?” इस पर सरकारी वकील ने जवाब दिया कि संभवतः बिल पेश किया जा सकता है।
फिलहाल नहीं होगी रिकवरी की कार्रवाई
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया कि मामले में अदालत के अगले आदेश तक निजी स्कूलों से पिछले 3 वर्षों की 5 प्रतिशत से अधिक वसूली गई फीस वापस (Refund) लेने की कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे निजी स्कूल प्रबंधनों को फिलहाल अंतरिम राहत मिली है।











