शहर पूछता है: टेंडर पास, काम गायब! पठानकोट का ऑडिटोरियम बना ‘वीआईपी खंडहर’
पठानकोट, पंजाब: कागजों में जिसे शहर के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की शान कहा जाता है, वह सरकारी ऑडिटोरियम अब प्रशासनिक अनदेखी के कारण एक ‘वीआईपी खंडहर’ में तब्दील हो चुका है। AMI News के विशेष कार्यक्रम ‘शहर पूछता है’ की ग्राउंड रिपोर्ट में पठानकोट के इस सबसे बड़े सांस्कृतिक मंच की बदहाली का कड़वा सच उजागर हुआ है।
नेताओं के भाषणों और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच पिसा ऑडिटोरियम
पठानकोट का यह सरकारी ऑडिटोरियम शहर का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ बड़े-बड़े नेता, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य लोग आते हैं, लंबे-चौड़े भाषण देते हैं और रिबन काटते हैं। लेकिन जैसे ही वीआईपी गाड़ियों का काफिला रवाना होता है, इस इमारत पर फिर से उपेक्षा का ताला लग जाता है।
इमारत की स्थिति: दुर्घटना को खुला न्योता
- टूटी दीवारें और प्लास्टर: इमारत की दीवारें जगह-जगह से टूटकर गिर रही हैं, मानो इसे कोई प्राचीन धरोहर बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही हो।
- टूटे काँच: खिड़कियों के टूटे काँच हर आने-जाने वाले का स्वागत करते हैं और किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहे हैं।
- छतों पर पीपल के पेड़: जिस मुख्य भवन की सफाई और रखरखाव के नाम पर बजट पास होता है, उसकी दीवारों और छतों पर झाड़ियां तथा पीपल के पेड़ उग चुके हैं। स्थिति ऐसी है कि यहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम कम और ‘जंगल सफारी’ का अनुभव ज्यादा मिलने लगा है।
- गंदगी का आलम: वीआईपी कार्यक्रमों के समय दिखावे के लिए थोड़ी-बहुत सफाई कर ली जाती है, लेकिन आम दिनों में चारों तरफ धूल, बदबू और गंदगी पसरी रहती है।
टेंडर पास, लेकिन धरातल पर ईंट भी नहीं लगी
सबसे बड़ा सवाल इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की कार्यशैली पर उठता है।
“कागज काले हो चुके हैं और मरम्मत का टेंडर भी पास हो चुका है, लेकिन धरातल पर आज तक एक ईंट भी नहीं लगाई गई।”
जनता के खून-पसीने की कमाई से बनी इस सरकारी संपत्ति की मरम्मत की फाइलें किस अलमारी में बंद पड़ी हैं, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। ऐसा लगता है मानो मरम्मत का काम ‘मिस्टर इंडिया’ बनकर गायब हो गया है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठते तीखे सवाल:
- क्या इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और संबंधित अधिकारी किसी बड़े हादसे या पूरी इमारत के जमींदोज होने का इंतजार कर रहे हैं?
- जब शहर के आला अफसर और जन प्रतिनिधि इसी ऑडिटोरियम में आकर बैठते हैं, तो उन्हें यह बदहाली क्यों दिखाई नहीं देती?
- क्या जनता के टैक्स के पैसों की कोई कीमत नहीं है?
AMI News ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन या इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पास इस बर्बादी का कोई ठोस जवाब या स्पष्टीकरण है, तो उनका पक्ष भी प्रमुखता से सामने रखा जाएगा।













