बड़ी साजिश नाकाम: टोंक में 150 किलो विस्फोटक के साथ दो गिरफ्तार, दिल्ली लाल किला धमाके से जुड़ रहे तार

टोंक/जयपुर : राजस्थान के टोंक जिले में नए साल की पूर्व संध्या पर पुलिस ने एक बड़ी आतंकी या आपराधिक साजिश को विफल कर दिया है। जिला विशेष टीम (DST) ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 150 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक बरामद किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी विस्फोटक का इस्तेमाल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण धमाके में किया गया था। पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
यूरिया की बोरियों में छिपा था ‘मौत का सामान’
पुलिस अधीक्षक (SP) मृत्युंजय मिश्रा के अनुसार, DST को इनपुट मिला था कि बूंदी से टोंक की ओर एक कार में विस्फोटक ले जाया जा रहा है। टीम ने बरोनी थाना क्षेत्र में नाकेबंदी कर एक मारुति सियाज कार को रोका। तलाशी के दौरान कार में यूरिया खाद की बोरियां मिलीं, जिनके भीतर चतुराई से 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट छिपाकर रखा गया था।
बरामदगी की सूची:
- विस्फोटक: 150 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट
- उपकरण: 200 विस्फोटक बैटरियां (डेटोनेटर के रूप में संभावित)
- फ्यूज वायर: करीब 1100 मीटर (6 बंडल सेफ्टी फ्यूज तार)
- वाहन: मारुति सियाज कार जब्त

बूंदी के रहने वाले हैं आरोपी
पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुरेंद्र पटवा और सुरेंद्र मोची के रूप में हुई है। ये दोनों बूंदी जिले के निवासी हैं। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि वे इस खेप को बूंदी से टोंक में किसी को सप्लाई करने जा रहे थे।
लाल किला धमाके से कनेक्शन की जांच
इस बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास जो धमाका हुआ था, उसमें भी अमोनियम नाइट्रेट का ही उपयोग पाया गया था। पुलिस अब इस एंगल से जांच कर रही है कि क्या ये आरोपी किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का हिस्सा हैं या यह खेप अवैध खनन (Illegal Mining) के लिए ले जाई जा रही थी।
“हमने विशिष्ट खुफिया जानकारी पर तुरंत ऑपरेशन चलाया। आरोपियों से सघन पूछताछ की जा रही है ताकि विस्फोटकों के मुख्य स्रोत और उनके असली मकसद का पता लगाया जा सके।”
— मृत्युंजय मिश्रा, पुलिस अधीक्षक, टोंक

हाई अलर्ट पर राजस्थान
नए साल के जश्न से ठीक पहले इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक मिलने के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियां (IB) और राजस्थान एटीएस (ATS) भी टोंक पुलिस के संपर्क में हैं। पुलिस आरोपियों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स और पिछले संपर्कों को खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि टोंक में यह डिलीवरी किसे दी जानी थी।








