संसद में गूँजी आम आदमी की आवाज़: राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स से लेकर टैक्स सुधारों तक उठाए तीखे सवाल

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद के शीतकालीन सत्र में जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। चड्ढा ने जोर देकर कहा कि सांसदों का प्राथमिक कर्तव्य जनता की आवाज को सदन के पटल पर रखना है, क्योंकि संसद का हर मिनट टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई से चलता है।
गिग वर्कर्स और डिजिटल क्रिएटर्स के हक में आवाज़
चड्ढा ने ‘गिग इकोनॉमी’ में काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये लोग “रोबोट नहीं, बल्कि हाड़-मास के इंसान हैं।” उन्होंने 10 मिनट की डिलीवरी जैसी ‘क्रूर’ व्यवस्था को खत्म करने और गिग वर्कर्स के लिए उचित वेतन, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स पर होने वाले मनमाने ‘कॉपीराइट स्ट्राइक’ का मुद्दा उठाते हुए कॉपीराइट एक्ट, 1957 में संशोधन की आवश्यकता बताई, ताकि ‘फेयर यूज़’ और ‘पायरेसी’ के बीच का अंतर स्पष्ट हो सके।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर सरकार को घेरा
सांसद ने निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों के ‘कथित शोषण’ पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा एक ‘गारंटी’ होनी चाहिए, न कि ‘जुआ’। क्लेम खारिज होने की बढ़ती घटनाओं और कैशलेस इलाज में आने वाली दिक्कतों पर उन्होंने जवाबदेही तय करने की मांग की। पर्यावरण के मुद्दे पर चड्ढा ने पंजाब सहित देश के अन्य हिस्सों में गिरते भूजल स्तर और यूरेनियम संदूषण (Contamination) जैसे गंभीर विषयों पर चिंता व्यक्त की।
आर्थिक सुधारों के लिए दिए ठोस सुझाव
अर्थव्यवस्था और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए राघव चड्ढा ने वित्त मंत्री के समक्ष तीन मुख्य सुझाव रखे:
कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत: घरेलू निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स फ्री लिमिट बढ़ाई जाए और इंडेक्सेशन का लाभ बहाल किया जाए।
GST युक्तिकरण: यह सुनिश्चित किया जाए कि टैक्स में कटौती का सीधा लाभ आम उपभोक्ता की जेब तक पहुँचे।
टोकनाइजेशन बिल: ब्लॉकचेन आधारित निवेश के लिए एक स्पष्ट कानून लाया जाए ताकि वैश्विक निवेश भारत की ओर आकर्षित हो।

”संसद आपके पैसे से चलती है”
सोशल मीडिया के जरिए जनता से जुड़ते हुए चड्ढा ने कहा, “हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं। संसद वह मंच है जहाँ आम आदमी की परेशानियों का समाधान निकलना चाहिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगे भी मजदूरों, उपभोक्ताओं और निवेशकों के हितों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।








