फेफड़ों का कैंसर: क्या सिर्फ सिगरेट और तंबाकू छोड़ने से टल जाएगा इस जानलेवा बीमारी का खतरा?
दुनियाभर में जानलेवा साबित हो रही बीमारियों में कैंसर का नाम सबसे ऊपर आता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार कैंसर दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है, जहां साल 2018 में इसके कारण लगभग 96 लाख लोगों की जान गई थी, वहीं साल 2022 में अकेले फेफड़ों के कैंसर के 25 लाख नए मामले सामने आए जिनमें 18 लाख लोगों की मौत हो गई। ये डरावने आंकड़े यह साबित करने के लिए काफी हैं कि यह बीमारी कितनी खतरनाक रूप ले चुकी है। हमारे शरीर में फेफड़े सांस लेने का मुख्य अंग हैं जो शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालते हैं, लेकिन खराब जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण के कारण फेफड़े धीरे-धीरे कमजोर होकर कैंसर जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।
फेफड़ों का कैंसर तब होता है जब फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर और स्मॉल सेल लंग कैंसर। इस बीमारी की सबसे भयावह बात यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण आसानी से नजर नहीं आते और जब तक लक्षण दिखाई देते हैं तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। हालांकि धूम्रपान इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे रिस्क फैक्टर हैं जो किसी भी व्यक्ति को खतरे में डाल सकते हैं। पैसिव स्मोकिंग यानी आसपास किसी और के सिगरेट पीने से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आना, जहरीली हवा में सांस लेना, काम के दौरान एस्बेस्टस, सिलिका और डीजल के धुएं का असर, प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली रेडियोएक्टिव रेडॉन गैस, तथा परिवार में कैंसर का इतिहास या फेफड़ों की पुरानी बीमारियां भी लंग कैंसर की मुख्य वजह बनती हैं।
इस जानलेवा बीमारी की पहचान समय पर करने के लिए इसके शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी है। लगातार रहने वाली खांसी जो ठीक न हो, सीने में दर्द या भारीपन, सांस लेने में तकलीफ या घरघराहट, खांसी के साथ खून आना, हर वक्त अत्यधिक थकान महसूस होना, बिना किसी कारण के अचानक वजन घटना और बार-बार फेफड़ों में इंफेक्शन होना इसके प्रमुख लक्षण हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या सिर्फ सिगरेट या तंबाकू छोड़ने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा पूरी तरह टल जाता है, लेकिन ऐसा सोचना आधा सच है। केवल स्मोकिंग बंद करना ही काफी नहीं है, बल्कि खतरे को पूरी तरह कम करने के लिए तंबाकू से दूरी बनाने के साथ-साथ कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य है ताकि केमिकल और धुएं से बचाव हो सके, और घर से बाहर निकलते वक्त प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए मास्क का उपयोग करना भी बेहद जरूरी है।











