AMI News: पठानकोट इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की कार्रवाई या महज़ औपचारिकता? ईडब्ल्यूएस प्लॉट्स पर अवैध निर्माण पर उठे सवाल
पठानकोट में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के आवासीय प्लॉट्स पर अवैध दुकानों के निर्माण और उसके बाद पठानकोट इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने महज़ एक छोटी सी दीवार का कोना तोड़कर और नोटिस का ढोंग रचकर सिर्फ आईवॉश किया है, जबकि असल कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है।
जब मीडिया ने ईडब्ल्यूएस प्लॉट्स पर बनी अवैध दुकानों की खबर को प्रमुखता से दिखाया, तो ट्रस्ट में हड़कंप मच गया और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ एक बिल्डिंग की दीवार का कोना तोड़कर इतिश्री कर ली गई। सवाल यह उठता है कि यदि कार्रवाई करनी ही थी, तो कानून के मुताबिक पूरी अनधिकृत बिल्डिंग पर बुलडोजर क्यों नहीं चलाया गया? सिर्फ एक छोटी सी दीवार तोड़कर जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की जा रही है, ताकि अंदर चल रहा अवैध कमर्शियल खेल यूं ही चलता रहे।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के ‘राजेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ पंजाब’ मामले के अनुसार, 10 साल की सीमा पूरी होने के बाद भी प्लॉट्स बेचना या ट्रांसफर करना अवैध नहीं है, लेकिन असली सवाल यह है कि ट्रांसफर फीस जमा होने के बाद क्या रेजिडेंशियल प्लॉट्स का लैंड यूज बदला गया? ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार, इन ईडब्ल्यूएस प्लॉट्स पर दुकानें बनाने या कमर्शियल काम करने के लिए कोई सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) जारी नहीं किया गया है। अगर जमीन रेजिडेंशियल थी और सीएलयू नहीं था, तो दुकानें बनी कैसे, यह एक बहुत बड़ा सवाल है।
जब यह अवैध निर्माण खड़ा हो रहा था, तब ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सो रहे थे और आज जब पोल खुल गई है, तो सिर्फ एक दीवार तोड़कर बेवकूफ बनाया जा रहा है। अधिकारी शायद यह भूल रहे हैं कि मामला अब सिर्फ ढिलाई का नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी अदालत के आदेशों की अवहेलना का है। सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को ‘लोगनाथन बनाम स्टेट ऑफ तमिलनाडु’ मामले में सख्त निर्देश दिए थे कि जिन क्षेत्रों का लैंड यूज रेजिडेंशियल है, वहां कमर्शियल गतिविधियां बिल्कुल बर्दाश्त न की जाएं।
सुप्रीम कोर्ट का तो साफ कहना है कि सील किया जाए, लेकिन पठानकोट इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट क्या कर रहा है, यह आप देख ही सकते हैं। यह महज़ अधिकारियों की लापरवाही नहीं, बल्कि सीधा-सीधा अवैध निर्माण और रसूखदारों को संरक्षण देने का मामला नजर आ रहा है। AMI News इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के इस आईवॉश को स्वीकार नहीं करेगा। पठानकोट की जनता अब मांग कर रही है कि इन प्लॉट्स का वर्तमान सैंक्शनड लैंड यूज सार्वजनिक किया जाए, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत इन कमर्शियल निर्माणों पर पूर्ण सीलिंग और डिमोलिशन की कार्रवाई की जाए, और इस अवैध निर्माण को बनने देने वाले नाममात्र की कार्रवाई करने वाले और खानापूर्ति करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।











