पुलिस की सीज़र के बाद भी नहीं थमा खनन माफिया, एयरपोर्ट और रेलवे पुल पर मंडराया बड़ा खतरा
पुलिस के तमाम एक्शन के बाद भी हिमाचल प्रदेश के डमटाल और माझरा क्षेत्र में खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं है। स्थिति यह है कि पुलिस द्वारा गाड़ियां और मशीनें सीज किए जाने के अगले ही पल माफिया फिर से अपनी जेसीबी और टिप्पर लेकर मैदान में आ धमकते हैं।
डमटाल और रामगोपाल मंदिर का वह इलाका, जिसकी जमीनों को खनन माफिया ने अंधाधुंध खुदाई कर के पूरी तरह छिन-भिन्न कर दिया है, अब बर्बादी की कगार पर पहुँच चुका है। हाल ही में खन्नी पंचायत के बिल्लांदा टाल और ब्राह्मणा दा नाला में हो रहे अवैध खनन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन जरूर हरकत में आया था और ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 17 सितंबर को दो जेसीबी, एक ट्रैक्टर व पाँच मल्टी एक्सल टिप्पर तथा 23 सितंबर को दो जेसीबी, चार टिप्पर व एक ट्रैक्टर जब्त किए थे।
इसके बावजूद माफिया की धृष्टता में कोई कमी नहीं आई है, जिससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पुलिस और माइनिंग विभाग का खौफ इन बदमाशों पर से पूरी तरह खत्म हो चुका है या फिर इसके पीछे किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण और मिलीभगत का खेल चल रहा है।
यह अवैध कारोबार सिर्फ जमीन की लूट तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। माझरा क्षेत्र में चल रहा यह अंधाधुंध खनन एयरपोर्ट से महज सात से आठ सौ मीटर की दूरी पर हो रहा है, जिसके कारण एयरपोर्ट रोड अब तक कम से कम दो से तीन बार बह चुका है और सड़क के धंसने से कई बार यहाँ की कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप और बंद हो चुकी है। सड़क टूटने के कुछ ही मीटर की दूरी पर एयरफोर्स की बाउंड्री वॉल भी मौजूद है, और यदि इस अवैध खनन को तुरंत नहीं रोका गया तो आने वाले समय में भूमि कटाव के चलते एयरफोर्स की दीवार भी ढह सकती है, जो सीधे तौर पर देश की सुरक्षा के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।
इसके अलावा, भारत को जम्मू-कश्मीर से जोड़ने वाला सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रेलवे पुल भी इसी अवैध माइनिंग के कारण भारी खतरे की चपेट में आ चुका है, जिसे बचाने के लिए पिछली बार सरकार को करोड़ों रुपए खर्च करने पड़े थे। एक वक्त ऐसा भी आया था जब हफ्तों तक ट्रेनें बंद रहीं और जब सुचारू हुईं तो उन्हें बेहद धीमी रफ्तार से गुजारना पड़ा।
अब देखना यह होगा कि नूरपुर पुलिस, इंदौरा प्रशासन और माइनिंग विभाग इस गंभीर मामले पर कब तक स्थायी और सख्त कार्रवाई अमल में लाता है।














