चंबा में भक्ति भाव के साथ मनाया गया बाबा श्रीचंद जी का 532वां प्रकाशोत्सव
चंबा की ऐतिहासिक धरती आज पूरी तरह आस्था और अध्यात्म के रंगों में रंगी नजर आई। अवसर था श्री गुरु नानक देव जी के ज्येष्ठ पुत्र बाबा श्रीचंद जी महाराज के 532वें प्रकाशोत्सव का, जिसके चलते प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। देश के अलग-अलग हिस्सों और बाहरी राज्यों से पहुंचे सैकड़ों अनुयाעियों ने बाबा जी के श्रीचरणों में शीश नवाकर सुख-शानति की कामना की। करीब एक महीने से चल रही तैयारियों के बाद आज मंदिर परिसर में भक्ति, उल्लास और धार्मिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
उदासीन परंपरा और चंबा से जुड़ाव
उदासीन परंपरा के प्रमुख संतों में माने जाने वाले बाबा श्रीचंद जी महाराज ने अपने भ्रमण के दौरान चंबा की इस पावन धरती पर भी चरण रखे थे। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, चंबा का यह प्राचीन मंदिर और यहाँ की संत परंपरा सदियों पुरानी आस्था की जीवंत तस्वीर है।
आस्था का केंद्र बनी है वह ऐतिहासिक ‘पवित्र शिला’
इस आयोजन के दौरान सबसे बड़ा आकर्षण वह प्राचीन पवित्र शिला रही, जिसे बाबा श्रीचंद जी महाराज से जोड़कर देखा जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, जब प्राचीन काल में साधु-संतों के प्रवेश पर रोक के कारण बाबा जी को रावी नदी के उस पार रोक दिया गया था, तब उन्होंने नदी किनारे पड़ी इस शिला को आदेश दिया था कि वह उन्हें रावी पार ले चले।
कहा जाता है कि वह शिला बाबा जी को लेकर रावी पार पहुँची और चंबा नगर के तीन चक्कर लगाने के बाद यहीं स्थिर हो गई। इस चमत्कार के बाद चंबा के राजा ने नतमस्तक होकर क्षमा मांगी थी और बाबा जी ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था। आज भी दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु इस पवित्र शिला के दर्शन कर इसे धन्य मानते हैं। मान्याताओं के अनुसार बाबा जी कुछ क्षणों के लिए इस शिला पर उतरे और अंतर्ध्यान होकर मणिमहेश के रास्ते धनछोह की ओर प्रस्थान कर गए थे।
देश-विदेश से पहुंची संगत, सजा भव्य दरबार
प्रकाशोत्सव के पावन पर्व पर मंदिर को बेहद सुंदर ढंग से सजाया गया था। सुबह से ही मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, सस्वर भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का दौर जारी रहा। बाहरी राज्यों व विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने न केवल मंदिर में माथा टेका, बल्कि एक-दूसरे को प्रकाशोत्सव की शुभकामनाएं भी दीं। चंबा की हसीन वादियों में गूंजते इन धार्मिक जयकारों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया है।













