भारत के चुनाव सिस्टम की अमेरिका में चर्चा: राष्ट्रपति ट्रंप ने दिए कड़े वोटर ID नियमों के संकेत, ‘SAVE America Act’ पास करने की अपील
भारत, जो कि 140 करोड़ की आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, अपनी निष्पक्ष और विशाल चुनाव प्रक्रिया के लिए पूरे विश्व में एक मिसाल प्रस्तुत कर रहा है। हाल ही में भारत की इसी मतदाता पहचान प्रणाली का उदाहरण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है। ट्रंप ने अमेरिका में सख्त वोटर आईडी (Voter ID) नियमों को लागू करने की आवश्यकता पर बल देते हुए अमेरिकी कांग्रेस से ‘सेव अमेरिका एक्ट’ (SAVE America Act) को जल्द से जल्द पारित करने की अपील की है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि ट्रंप का सोचना बिल्कुल सही है और अमेरिका को इस कानून को तुरंत मंजूरी देनी चाहिए।
क्या है ‘सेव अमेरिका बिल’?
’सेव अमेरिका बिल’ का मुख्य उद्देश्य फेडरल (संघीय) चुनावों में वोट डालने के लिए अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य करना है। इसके तहत मतदाताओं को वोटिंग के समय पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, सैन्य पहचान पत्र (Military ID) या वैध फोटो पहचान पत्र दिखाना जरूरी होगा।
इसके अतिरिक्त, इस बिल में मेल-इन (डाक के माध्यम से) वोटिंग के नियमों को भी सख्त बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत डाक से वोट देने का अधिकार केवल उन नागरिकों को मिलेगा जो बीमार हैं, दिव्यांग हैं, सेना में कार्यरत हैं या किसी यात्रा पर हैं।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच मतभेद
इस बिल को लेकर अमेरिकी राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है:
- रिपब्लिकन पार्टी का पक्ष: पार्टी का कहना है कि यह कानून चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
- डेमोक्रेटिक पार्टी का तर्क: डेमोक्रेटिक नेताओं का मानना है कि इस नियम से कम आय वाले नागरिकों के लिए मतदान करना कठिन हो जाएगा, क्योंकि उनके लिए ये दस्तावेज जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे लाखों नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी इस बिल को सीनेट में पास नहीं होने देगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर दिया भारत का उदाहरण
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बयान का जिक्र किया। ट्रंप के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका में बिना वैध फोटो आईडी के चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं?
ट्रंप ने आगे बताया कि भारत के पिछले आम चुनावों में लगभग 64.6 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया था, जिनमें से 1 प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक (मेल-इन) के जरिए वोट डाला और हर एक मतदाता के पास वैध फोटो पहचान पत्र मौजूद था।
यदि आप मतदान प्रक्रियाओं, नागरिकता आवश्यकताओं या चुनाव नियमों से संबंधित जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप U.S. Election Assistance Commission या भारत के Election Commission of India के आधिकारिक पोर्टलों पर जाकर जानकारी ले सकते हैं।












