पठानकोट मंडी में बेसहारा पशुओं का आतंक: दुकानदारों का फूटा गुस्सा, प्रशासन से लगाई समाधान की गुहार
पठानकोट :पठानकोट की मुख्य सब्जी और फल मंडी में बेसहारा पशुओं (आवारा गायों और सांडों) का जमावड़ा स्थानीय दुकानदारों, रेहड़ी चालकों और आम जनता के लिए भारी मुसीबत का सबब बन चुका है। मंडी में दिन-रात बेखौफ घूमते आवारा पशु न केवल आवाजाही को बाधित कर रहे हैं, बल्कि व्यापारियों के भारी आर्थिक नुकसान का कारण भी बन रहे हैं।
रोजी-रोटी पर मंडराता खतरा
सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत कर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले मंडी के दुकानदारों का कहना है कि यह समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल होती जा रही है। रेहड़ियों और दुकानों पर रखा फल व सब्जी पशु खा जाते हैं या कुचलकर खराब कर देते हैं।
- सुभाष महाजन (स्थानीय फल विक्रेता): “हम ग्राहकों को सामान दिखाने में व्यस्त होते हैं और पीछे से गाय आकर फल खा जाती है। कई बार लोग अपने पशुओं को दूध निकालना बंद होने पर आवारा छोड़ देते हैं, जो सीधी मंडी में आ जाते हैं। इन्हें पालना है तो घर पर रखें, इस तरह मंडी में लावारिस छोड़ना गलत है।”
- पेन कुमार (मंडी व्यापारी): “सब्जी और फल विक्रेताओं की हालत बहुत बुरी है। मंडी में इतने पशु घूमते हैं कि ग्राहक डर के मारे दुकान तक नहीं आते। व्यापार पूरी तरह ठप हो रहा है। इसके अलावा, मंडी में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है और बारिश के दिनों में जलभराव की कोई उचित निकासी नहीं है।”
ग्राहकों में डर, हादसों की आशंका
सब्जी मंडी में खरीदारी के लिए आने वाले आम लोगों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भीड़भाड़ वाले रास्ते में अचानक पशुओं के आ जाने से अक्सर भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है। कई बार ये पशु आपस में लड़ने लगते हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के घायल होने का जोखिम बना रहता है।
प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
मंडी के दुकानदारों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।
प्रमुख माँगें:
- आवारा पशुओं को पकड़कर तुरंत नज़दीकी गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाए।
- मंडी परिसर में नियमित सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था हो।
- पशुपालकों द्वारा सरेआम जानवरों को सड़क पर छोड़ने के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएँ।
दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो उनकी रोज़ी-रोटी पूरी तरह ठप हो जाएगी। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले का संज्ञान कब तक लेता है।











