परमाणु ऊर्जा और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा भारत: PM मोदी
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर दिया जोर
नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने परमाणु ऊर्जा और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठाए हैं।
परमाणु ऊर्जा: 2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए परमाणु ऊर्जा एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने तमिलनाडु के कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) की महत्वपूर्ण उपलब्धि का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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- नए रिएक्टर: देश में वर्तमान में पांच नए परमाणु रिएक्टर स्थापित किए जा रहे हैं।
- शांति एक्ट: संसद में ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘शांति’ एक्ट पास किया गया है।
- भविष्य का लक्ष्य: भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट (और आगे 200 गीगावाट तक) परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।
“ऊर्जा सुरक्षा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और भारत ने इस दिशा में पहले ही ठोस कदम उठा लिए हैं।”
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
सेमीकंडक्टर: 3 प्लांट में उत्पादन शुरू, 5-8 नए प्लांट जल्द
तकनीकी आत्मनिर्भरता पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन और हर आधुनिक तकनीक के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स अनिवार्य हैं।
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- उत्पादन और निर्यात: भारत के तीन सेमीकंडक्टर प्लांट में पहले ही उत्पादन शुरू हो चुका है और यहां से निर्यात भी जारी है।
- भविष्य की योजना: आने वाले 7 से 8 वर्षों में 5 से 8 नए सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने की उम्मीद है।
- तकनीकी स्वदेशीकरण: वर्षों तक सेमीकंडक्टर पर चर्चाओं के बावजूद बड़े पैमाने पर विनिर्माण सुविधाओं की कमी थी, जिसे अब दूर कर लिया गया है।
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यह यात्रा ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगी।











