खगोलीय प्रेमियों के लिए ऐतिहासिक दिन: आज लगेगा दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण, दिन में छाएगा अंधेरा
खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए आज का दिन बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रहा है। आज सावन (हरियाली अमावस्या) के दिन एक दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इस अद्भुत खगोलीय नजारे को देखने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों और आम लोगों में भारी उत्सुकता है। इस ग्रहण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके दौरान कुछ समय के लिए दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा जाएगा।
क्यों खास है यह सूर्य ग्रहण?
विशेषज्ञों के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। मुख्य यूरोपीय महाद्वीप में लगभग 27 वर्षों बाद (1999 के बाद) ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है। ब्रिटेन के लिए यह पल और भी खास है, क्योंकि लगभग तीन दशकों में पहली बार वहां के लोग ऐसा शानदार दृश्य देखेंगे, जहां सूर्य का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा। इसके बाद यूरोप में ऐसा दुर्लभ दृश्य देखने के लिए 64 साल का लंबा इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि अगला ऐसा ग्रहण 23 अगस्त, 2090 को लगेगा।
दिन में ही थम जाएगी दुनिया, दिखेगी अद्भुत संरेखण
पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाएगा और सूर्य को पूरी तरह से ढक लेगा। यह तीव्र अंधेरा लगभग 2 मिनट और 18 सेकंड तक रहेगा। इस दौरान तापमान में काफी गिरावट आएगी और दिन के उजाले में भी आसमान में तारे साफ दिखाई देने लगेंगे।
वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य चंद्रमा से 400 गुना बड़ा है, लेकिन वह चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी से 400 गुना दूर भी है। इसी सटीक अनुपात के कारण दोनों आसमान में एक ही आकार के दिखाई देते हैं।
भारत में प्रभाव और समय
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका कोई नकारात्मक या सकारात्मक प्रभाव यहां प्रासंगिक नहीं है। जब यह ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में रात होगी।
भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण 12 अगस्त को रात 09:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त को सुबह 04:25 बजे तक रहेगा।
प्रकृति में दिखेंगे हैरान करने वाले बदलाव
खगोलशास्त्रियों का कहना है कि ग्रहण के चरम पर पहुंचते ही प्रकृति में कई बदलाव महसूस किए जाएंगे:
- सूर्य के पूरी तरह ढकने से दिन में ही रात का अहसास होगा।
- धूप रुकने से तापमान में अचानक गिरावट आएगी और हवा में नमी बढ़ जाएगी।
- पक्षी इसे रात मानकर अपने घोंसलों की ओर लौटने लगेंगे।
सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं
क्योंकि यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात के समय लग रहा है, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिर के कपाट खुले रहेंगे और सामान्य दिनचर्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
सामान्यतः सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है और ग्रहण खत्म होने पर समाप्त होता है। हालांकि, धार्मिक विद्वानों का मानना है कि भले ही सूतक मान्य न हो, लेकिन ग्रहण से जुड़ी सामान्य सावधानियां बरती जा सकती हैं।
इन देशों में दिखेगा ‘महा-ग्रहण’
यह ऐतिहासिक दृश्य सबसे पहले ग्रीनलैंड के आर्कटिक फियोर्ड्स (Arctic Fjords) में दिखाई देगा। इसके बाद यह आइसलैंड और फिर स्पेन में नजर आएगा। यूरोप में आखिरी बार पूर्ण सूर्य ग्रहण 1999 में देखा गया था। स्पेन में यह नजारा सूर्यास्त से ठीक पहले दिखाई देगा, जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन अवसर साबित होगा।
सावधानियां: भूलकर भी न करें ये गलती!
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सूर्य ग्रहण को सीधे नग्न आंखों से देखना बेहद खतरनाक हो सकता है। सूर्य को सीधे देखने से आंखों के रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है, जिससे अंधापन या धुंधलापन हो सकता है। यदि आंखों में जलन या दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बचाव के उपाय:
- ग्रहण देखने के लिए हमेशा प्रमाणित सोलर एक्लिप्स ग्लासेज (Solar Eclipse Glasses) का ही उपयोग करें।
- ग्रहण देखने के बाद अपनी आंखों की जांच अवश्य करवाएं।











