पत्रकार हत्या मामला: राम रहीम को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट सोमवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 2002 में हुई एक पत्रकार की हत्या के मामले में बरी करने के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा, “इस मामले पर विचार करने की आवश्यकता है।”
16 नवंबर से शुरू होगी अंतिम सुनवाई
शीर्ष अदालत ने मृतक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अरिदमन द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए इस मामले को 16 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
पीठ की मुख्य टिप्पणियां
- राज्य की अपील पर पक्ष: राम रहीम की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि राज्य सरकार या जांच एजेंसी की तरफ से हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई है।
- निचली अदालत का फैसला पलटने का मामला: इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा सुनाई गई सजा को हाईकोर्ट द्वारा पलटने (Reversal) का है, न कि ऐसा मामला जहां हाईकोर्ट ने बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा हो।
- अदालत का रुख: पीठ ने कहा, “हम इस बात से भी पूरी तरह वाकिफ हैं कि हो सकता है राज्य सरकार या एजेंसी इस फैसले के खिलाफ अपील न करे।” इसके साथ ही अदालत ने मामले से जुड़े निचली अदालत के रिकॉर्ड भी तलब किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2002 में सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 2019 में विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, मार्च में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम को इस मामले में साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।











