ऐतिहासिक बदलाव: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’
ध्वजारोहण और राष्ट्रगान से पहले होगा राष्ट्रगीत का गायन; रक्षा मंत्रालय ने जारी किया नया प्रोटोकॉल
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार लाल किले की प्राचीर से एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के तुरंत बाद पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। इसके उपरांत प्रधानमंत्री तिरंगा फहराएंगे और फिर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का गायन होगा। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को इस नए प्रोटोकॉल की आधिकारिक जानकारी साझा की।
समारोह का नया क्रम (New Protocol)
रक्षा सचिव आर.के. सिंह के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्यक्रम निम्नलिखित क्रम में आयोजित होगा:
- प्रधानमंत्री का आगमन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर पर पहुंचेंगे।
- राष्ट्रगीत गायन: समारोह में उपस्थित सभी लोग सम्मान में खड़े होंगे और ‘वंदे मातरम्’ बजाया/गाया जाएगा।
- ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान: इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और फिर ‘जन गण मन’ का गायन होगा।
अब तक की पारंपरिक प्रक्रिया में प्रधानमंत्री के प्राचीर पर पहुँचने के बाद सीधे ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और उसके बाद राष्ट्र के नाम संबोधन की व्यवस्था रही है। यह पहला मौका है जब राष्ट्रगीत को ध्वजारोहण से पूर्व स्थान दिया जा रहा है।
केंद्र गृह मंत्रालय के नए दिशानिर्देश
केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय द्वारा जारी विस्तृत दिशानिर्देशों के तहत:
- जब किसी भी आधिकारिक या सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाएंगे, तब राष्ट्रगीत को हमेशा राष्ट्रगान से पहले प्रस्तुत किया जाएगा।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी इस संबंध में स्पष्ट निर्देश भेज दिए गए हैं ताकि सभी आधिकारिक समारोहों में एक समान प्रोटोकॉल का पालन हो।
रचना के 150 वर्ष और विशेष महत्व
वर्ष 2026 में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस उपलक्ष्य में केंद्र सरकार पूरे देश में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रही है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य थीम (Theme) भी ‘वंदे मातरम्’ पर ही आधारित था।
राजनीतिक परिदृश्य: > सरकार जहां इस निर्णय को स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य विरासत, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में रेखांकित कर रही है, वहीं विपक्ष के कुछ नेताओं ने सरकार के नए प्रोटोकॉल और इसके विभिन्न पहलुओं को लेकर सवाल भी उठाए हैं।











