बढ़ते ख़तरे के बीच सरकारी दावों की खुली पोल: बरसात के मौसम में भी खन्नी पंचायत में धड़ल्ले से जारी है अवैध खनन
हिमाचल पुलिस और खनन विभाग बेबस! सबूत मिलने के बाद भी कार्रवाई न होने से सुलग रहे सवाल
पठानकोट/हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के खन्नी पंचायत स्थित ‘ब्राह्मणा दा नाल’ क्षेत्र में अवैध खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो राज्य सरकार के नियमों की परवाह है और न ही पुलिस प्रशासन का कोई डर। मानसूनी बारिश के कारण जहाँ पूरे देश और प्रदेश में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है, वहीं इस इलाके में दिन-रात बेखौफ होकर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है।
4 और 5 अगस्त की एक्सक्लूसिव फुटेज और लगातार सामने आ रहे पुख्ता सबूतों ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात के अंधेरे से लेकर सुबह के उजाले तक गूंज रही मशीनों की गर्जना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में 1 से 3 अगस्त तक लगातार अवैध खनन के सबूत सामने आने के बावजूद 4 अगस्त की रात 8:00 बजे और 5 अगस्त की सुबह 9:00 बजे भी धड़ल्ले से भारी मशीनें चलती देखी गईं। मानसून के मौसम में प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन खनन माफिया नदियों और नालों का सीना छलनी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और खनन विभाग की निष्क्रियता के कारण माफिया बेखौफ होकर कुदरत की संपत्ति को नुकसान पहुँचा रहा है।
“शमशान घाट की शेड बही, ज़मीनें धंसने लगीं” — पीड़ित स्थानीय निवासी सलविंदर सिंह की जुबानी
अवैध खनन से परेशान खन्नी पंचायत के स्थानीय निवासी सलविंदर सिंह ने मीडिया से अपनी व्यथा साझा करते हुए प्रशासन की नाकामी उजागर की।
सलविंदर सिंह से बातचीत के मुख्य अंश:
- अवैध खनन की स्थिति: “पूरे देश में बरसात के समय खनन बंद रहता है, लेकिन हमारे यहाँ दिन-दिहाड़े मशीनें लगाकर खनन किया जा रहा है। गर्मियों में पानी न मिलने से लोग पहले ही परेशान थे और अब इस अवैध खनन ने हालात बदतर कर दिए हैं।”
- पंजाब के क्रशर और स्थानीय मशीनें: “खनन माफिया में पंजाब के 2-3 क्रशर मालिक और स्थानीय मशीनें शामिल हैं। यहाँ से माल भरकर पंजाब में सप्लाई किया जाता है या किराए पर लाई गई गाड़ियों से बेचा जा रहा है।”
- भारी नुकसान: “हमारी फसलें और उपजाऊ जमीनें नीचे की तरफ धंसने लगी हैं। नदी किनारे बना शमशान घाट का शेड भी बह गया है और अब खतरा आबादी तक पहुँच रहा है।”
- शिकायतों का असर नहीं: “हमने कई बार वीडियो बनाकर पुलिस और खनन विभाग को भेजीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”
बड़ा सवाल: क्या किसी संरक्षण में फल-फूल रहा है यह अवैध कारोबार?
लगातार मिल रहे सबूतों और शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न होना इस बात की ओर इशारा करता है कि खनन माफिया को किसी बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक तंत्र का संरक्षण प्राप्त हो सकता है। स्थानीय जनता में इस रवैये को लेकर भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के उजागर होने के बाद पुलिस और खनन विभाग नींद से जागते हैं या यह अवैध कारोबार यूं ही जारी रहेगा।












