चंबा सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री से मिले जल शक्ति पैरा वर्कर, सौंपा ज्ञापन
चंबा (जितेंद्र मेहरा) हिमाचल प्रदेश जल शक्ति विभाग में सेवाएं दे रहे पैरा कर्मचारियों का सब्र अब टूटने लगा है। महज 6,000 रुपये के मामूली मानदेय पर वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों ने अपने भविष्य की सुरक्षा और मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चंबा सर्किट हाउस पहुंचे ‘जल शक्ति पैरा कर्मचारी संघ’ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा।
3896 कर्मचारियों के भविष्य पर संकट
ज्ञापन के माध्यम से संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी पीड़ा रखी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से विभाग में मल्टी पर्पज वर्करों की भर्तियां की जा रही हैं। वर्तमान में प्रदेश भर में करीब 3,896 कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उम्रदराज वर्करों की बढ़ती चिंता: > संघ के अनुसार, इन कर्मचारियों में एक बड़ी संख्या ऐसे वर्करों की है जो 45 से 50 वर्ष की आयु सीमा पार कर चुके हैं। ऐसे में भविष्य के लिए कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण उनके सामने जीवन यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
विधवा महिलाओं और परिवारों पर दोहरा बोझ
कर्मचारियों ने ज्ञापन में विशेष रूप से महिला कर्मियों की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया। संघ ने कहा कि विभाग में कई ऐसी विधवा महिला कर्मचारी भी कार्यरत हैं, जिनके सिर से पति का साया उठ चुका है और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।
महज 6,000 रुपये के मासिक मानदेय में इस भीषण महंगाई के दौर में बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और स्वास्थ्य संबंधी खर्चे पूरे करना असंभव सा हो गया है।
मुख्य मांगें:
- 5 वर्ष की शॉर्ट टर्म पॉलिसी: कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तुरंत 5 साल की शॉर्ट टर्म सेवा सुरक्षा नीति (Short Term Policy) लागू की जाए।
- सम्मानजनक मानदेय बढ़ोतरी: 6,000 रुपये के मानदेय को बढ़ाकर वर्तमान महंगाई के अनुसार सम्मानजनक राशि तय की जाए।
- सेवा सुरक्षा की गारंटी: वर्षों से निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे वर्करों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
”भविष्य की नीति नहीं बनी तो जीना मुश्किल”
जल शक्ति पैरा कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे वर्षों से पूरी ईमानदारी के साथ विभाग की सेवाएं दे रहे हैं। यदि सरकार जल्द ही उनके लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाती और मानदेय में वृद्धि नहीं करती, तो हजारों परिवारों का पालन-पोषण करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। कर्मचारियों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री संवेदनशील रुख अपनाते हुए उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेंगे।











