शिमला के ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च की घड़ियाँ पड़ीं बंद, सैलानियों में निराशा
शिमला: हिल्स क्वीन’ शिमला के प्रसिद्ध रिज मैदान पर स्थित और “राजधानी का ताज” कहे जाने वाले ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च की खूबसूरती पर रखरखाव की कमी का साया पड़ने लगा है। उत्तरी भारत का यह दूसरा सबसे पुराना चर्च अपनी अद्भुत वास्तुकला से हर साल देश-विदेश के लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन चर्च की मीनार पर लगी ऐतिहासिक घड़ियों का बार-बार बंद होना अब सैलानियों और स्थानीय लोगों के लिए निराशा का कारण बन रहा है।
जंग की चपेट में 153 साल पुरानी घड़ियाँ
क्राइस्ट चर्च में लगी ये घड़ियाँ वर्ष 1873 में कर्नल डंबलेटन द्वारा भेंट की गई थीं। चर्च के सामने, बाईं और दाईं ओर तीन घड़ियाँ लगी हैं, जिनकी मुख्य खासियत यह है कि तीनों एक साथ संचालित होती हैं।
- तकनीकी बदलाव: शुरुआत में ये घड़ियाँ मैकेनिकल प्रणाली से चलती थीं, जिन्हें बाद में बिजली व बैटरी संचालित बनाया गया।
- खराबी का कारण: वर्तमान में घड़ियाँ जंग की चपेट में आ चुकी हैं। हाल ही में मरम्मत कराए जाने के महज़ एक दिन बाद ही ये फिर से ठप हो गईं।
चर्च की पादरी डॉ. विनिता रॉय के अनुसार, घड़ियों को कई बार ठीक करवाया गया है, लेकिन बार-बार खराब होने की सटीक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पा रही है। इनके ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
10 साल से नहीं बदली गई टूटी कांच की खिड़की
चर्च में रंगीन कांच की पाँच बड़ी खिड़कियाँ लगी हैं, जो ईसाई धर्म के पाँच मुख्य स्तंभों—विश्वास, उम्मीद, परोपकार, धैर्य और विनम्रता का प्रतीक हैं।
- चोरी का प्रयास: वर्ष 2014 में चोरों ने इसी कांच को तोड़कर चर्च में घुसने की कोशिश की थी।
- लंबित मरम्मत: एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस ऐतिहासिक कीमती कांच की मरम्मत नहीं हो सकी है।
चर्च की मुख्य धरोहर: 125 साल पुराना ‘किंग ऑफ ऑर्गन’
क्राइस्ट चर्च सिर्फ अपनी बनावट के लिए ही नहीं, बल्कि अपने दुर्लभ संगीत उपकरणों के लिए भी जाना जाता है:
- पाइप ऑर्गन: वर्ष 1899 में इंग्लैंड से लाया गया 125 साल पुराना यह वाद्य यंत्र ‘किंग ऑफ ऑर्गन’ के नाम से जाना जाता है।
- विशालकाय संरचना: तीन मंजिला ऊँचे इस ऑर्गन को बजाने के लिए इसके भीतर प्रवेश करना पड़ता है। इसके हर हिस्से से अलग और मधुर धुन निकलती है।
क्राइस्ट चर्च का मुख्य इतिहास
- नींव रखने की तिथि: 9 सितंबर 1844 को बिशप डेनियल विल्सन द्वारा रखी गई थी।
- निर्माण और शैली: यह चर्च वर्ष 1857 में नियो-गॉथिक शैली में बनकर तैयार हुआ। इसे बनने में लगभग 13 वर्ष लगे।
- डिजाइनर: इसका डिजाइन कर्नल जे.टी. बोयलियो ने तैयार किया था।
- ऐतिहासिक घंटी: चर्च पर लगी बड़ी घंटी वर्ष 1860 में कर्नल डंबलेटन द्वारा दान की गई थी।











