पानी के बढ़े दाम और ठप पड़े बिलों पर फूटा गुस्सा, सामाजिक संगठनों ने उपमुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
सितंबर 2025 से भुगतान प्रक्रिया बंद होने पर भड़के लोग; सरकार से स्थिति स्पष्ट करने और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जवाब देने की मांग
चम्बा (02 अगस्त) चम्बा में जल एवं सीवरेज शुल्क में की गई भारी वृद्धि और पिछले कई महीनों से बिलों की भुगतान प्रक्रिया बंद रहने को लेकर आम जनता और सामाजिक संगठनों का आक्रोश चरम पर है। रविवार को चम्बा के प्रमुख सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जल शक्ति मंत्री व उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विभाग न तो बिल जमा कर रहा है और न ही इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब दे रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में असमंजस और भारी असंतोष का माहौल बना हुआ है।
बिल भुगतान बंद होने से संशय बरकरार
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सितंबर 2025 के बाद से जल शक्ति विभाग ने पानी और सीवरेज बिलों का भुगतान स्वीकार करना अचानक बंद कर दिया है। इससे पहले वर्ष 2025 में जल शक्ति विभाग द्वारा पानी व सीवरेज की दरों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की गई थी। इसके अलावा, उपभोक्ताओं पर जल मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया था और मीटर न लगाने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी भी जारी की गई थी, जिसका जिलेभर में तीखा विरोध हुआ था।
दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर जनता
सामाजिक संगठनों का आरोप है कि जल शुल्क वृद्धि पर हुए भारी जनविरोध के बाद विभाग ने कोई लिखित या व्यावहारिक समाधान निकालने के बजाय भुगतान लेना ही बंद कर दिया। विभाग द्वारा न तो कोई सार्वजनिक सूचना जारी की गई और न ही स्थिति स्पष्ट की गई। इस कारण प्रतिदिन आम लोग विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है।
16 फरवरी को भी दिया था ज्ञापन, नहीं हुई सुनवाई > ज्ञापन में यह भी याद दिलाया गया कि इस समस्या को लेकर 16 फरवरी 2026 को भी सरकार को ज्ञापन सौंपा गया था। हालांकि, दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो कोई बैठक बुलाई गई और न ही इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया।
प्रमुख मांगें:
- स्थिति स्पष्ट हो: बिल भुगतान रोकने के कारणों का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाए।
- स्थायी या अस्थायी नीति: सरकार बताए कि वर्तमान में जारी यह व्यवस्था अस्थायी है या स्थायी।
- भविष्य की नीति: भविष्य में जल आपूर्ति और शुल्क को लेकर सरकार की नीति क्या रहेगी, इसे सार्वजनिक किया जाए।
- एकमुश्त वसूली का डर: लंबे समय से बकाया बिलों की एकमुश्त वसूली को लेकर जनता में बने डर को दूर किया जाए।
संगठनों ने उपमुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार जल्द लिखित स्पष्टीकरण जारी करे या फिर चम्बा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्थिति को पूरी तरह पारदर्शी बनाए।

- सुरेश कश्मीरी (सामाजिक कार्यकर्ता): > “जनता को बिना बताए बिल लेना बंद कर देना समझ से परे है। विभाग अपनी गलतियों को छिपाने के लिए चुप्पी साधे बैठा है और आम लोग दफ्तरों के चक्कर काटकर परेशान हो रहे हैं। सरकार को तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।”
- डी.के. सोनी (जागरूक नागरिक/प्रतिनिधि): > “हमने इससे पहले भी ज्ञापन दिया था, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अगर बिलों की एकमुश्त भारी वसूली का बोझ जनता पर डाला गया तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री जी से मांग है कि वे चम्बा आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जनता की शंकाएं दूर करें।”












