व्यभिचार (Adultery) के आरोप पर फैसला अंतरिम गुजारा भत्ते से पहले हो: सुप्रीम कोर्ट
अदालत का फैसला: प्रारंभिक सबूतों से आरोप सही दिखे तो गुजारा भत्ता रोका जा सकता है; प्राइवेट जासूसों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली / उदयपुर : सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और गुजारा भत्ता (Maintenance) से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पति द्वारा पत्नी पर व्यभिचार (व्यभिचारी आचरण/अवैध संबंध) का आरोप लगाया जाता है, तो अदालत को अंतरिम गुजारा भत्ता तय करने से पहले उस आरोप पर प्रारंभिक स्तर (Prima Facie) पर विचार करना होगा।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि अदालतों का यह सोचना गलत है कि ऐसे आरोपों का फैसला केवल सुनवाई के अंतिम चरण में ही किया जा सकता है।
CrPC की धारा 125(4) का दिया हवाला
पीठ ने अपने फैसले में कहा:
“दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125(4) में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि पत्नी पर व्यभिचार का आरोप साबित हो जाता है, तो वह न तो अंतरिम और ना ही अंतिम गुजारा भत्ता पाने की हकदार होगी। इसलिए यदि पति धारा 125(4) के तहत याचिका दायर करता है और शुरुआती सबूतों के आधार पर पहली नजर में (ex-facie) आरोप साबित कर देता है, तो अंतरिम गुजारा भत्ते पर रोक लगाई जा सकती है।”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राजस्थान के उदयपुर का है, जहाँ दंपति का विवाह 7 जुलाई 2014 को हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया।
- 13 मई 2020: पत्नी अपने बच्चे और कीमती सामान के साथ ससुराल छोड़कर अलग रहने लगी और उदयपुर की मजिस्ट्रेट अदालत में अंतरिम गुजारा भत्ते के लिए आवेदन किया।
- पति की दलील: पति ने CrPC की धारा 125(4) के तहत अर्जी दाखिल कर तर्क दिया कि पत्नी के व्यभिचारी आचरण के कारण वह किसी भी गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है। इसके समर्थन में पति ने कई तस्वीरें और वीडियो साक्ष्य के रूप में पेश किए।
- निचली अदालत व हाई कोर्ट का फैसला: निचली अदालत और राजस्थान हाई कोर्ट ने पति की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इन सबूतों और आरोपों का फैसला मुख्य याचिका की सुनवाई (ट्रायल) के अंत में ही हो सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट का रुख: पति ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहाँ शीर्ष अदालत ने निचली अदालतों के रुख को गलत ठहराते हुए मामले को पुनः विचार के लिए भेज दिया।
प्राइवेट जासूसों और सबूत जुटाने के तरीकों पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की तस्वीरें और वीडियो हासिल करने के लिए पति द्वारा निजी जासूस (Private Detective) का इस्तेमाल किए जाने पर भी चिंता जताई। पीठ ने कहा कि आधुनिक दौर में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और जासूसी के जरिए सबूत जुटाने के बदलते तरीकों से निपटने के लिए एक स्पष्ट कानूनी तंत्र व नियम होने चाहिए।











