कोल ब्लॉक आवंटन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला बंद किया
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को 2005 के कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में देश के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उन्हें आरोपी के रूप में समन जारी करने वाले निचली अदालत के आदेश को भी रद्द कर दिया। उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री का 27 दिसंबर 2024 को निधन हो गया था और इस फैसले के साथ ही वे अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में औपचारिक रूप से दोषमुक्त (बरी) हो गए हैं।
मुख्य बिंदु:
- सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पीएम को क्लीन चिट देने वाली सीबीआई की जांच रिपोर्ट को सही ठहराया।
- निचली अदालत के आदेश पर सवाल: अदालत ने कहा कि स्पेशल जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने का कोई ठोस कारण नहीं था।
- 10 साल पुराना समन रद्द: 2015 में जारी समन और आपराधिक कार्रवाई के आदेश को निरस्त किया गया।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को दी मंजूरी
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और अन्य को क्लीन चिट देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को स्वीकार कर लिया।
शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा:
”हालांकि डॉ. सिंह के दुखद निधन के कारण यह याचिका निष्प्रभावी मानी जा सकती थी, लेकिन विशेष न्यायाधीश द्वारा उन्हें समन जारी करने के पहलू की समीक्षा करना आवश्यक था। सीबीआई द्वारा दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि निचली अदालत के पास इस रिपोर्ट को खारिज करने और संज्ञान लेने का कोई उचित कानूनी आधार नहीं था।”
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबारी-II कोल ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा हुआ है।
- अतिरिक्त प्रभार: उस समय कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास ही था।
- निचली अदालत का समन: इस मामले में एक विशेष अदालत ने मार्च 2015 में डॉ. मनमोहन सिंह के अलावा उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी. सी. पारख और मैसर्स हिंडाल्को (Hindalco) समेत अन्य को आरोपी के तौर पर समन जारी किया था।
- आरोप: इन सभी पर आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में ही इस समन पर रोक लगा दी थी और अब सीबीआई की जांच से सहमति जताते हुए इस पूरे मामले को अंतिम रूप से बंद कर दिया है।











