सुजानपुर में मनरेगा कर्मियों का फूटा गुस्सा: बीडीपीओ कार्यालय के बाहर धरना, नियमित करने व वेतन जारी करने की मांग

पठानकोट/सुजानपुर: सुजानपुर स्थित बीडीपीओ (BDPO) कार्यालय के बाहर ग्राम रोजगार सेवकों और मनरेगा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी उपेक्षा पर गहरा रोष व्यक्त किया।
17 वर्षों से अस्थायी सेवाएं, साढ़े चार साल बाद भी वादा अधूरा
मनरेगा यूनियन सुजानपुर के ब्लॉक प्रधान राजेश कुमार ने बताया कि मनरेगा कर्मचारी पिछले 17 वर्षों से अत्यंत कम संसाधनों और अस्थायी रूप से अपनी सेवाएं विभाग को दे रहे हैं। उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए कहा:
”वर्ष 2022 में मौजूदा सरकार ने सत्ता में आने के समय कच्चे कर्मचारियों को नियमित (पक्का) करने का बड़ा वादा किया था। लेकिन आज करीब साढ़े चार साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी हमारी जायज मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।”

राजेश कुमार ने आगे कहा कि यूनियन की सरकार और प्रशासन के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। हर बार केवल जल्द मांगें मानने का खोखला आश्वासन दिया जाता है, मगर जमीनी स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया गया।
मनरेगा कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:
- स्थायी नियुक्ति: पिछले 17 वर्षों से काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों को तुरंत नियमित किया जाए।
- पंचायती राज विभाग में विलय: मनरेगा कर्मचारियों को पंचायती राज विभाग में शामिल कर स्थायी लाभ दिए जाएं।
- बकाया वेतन का भुगतान: पिछले कई महीनों से रुका हुआ वेतन तुरंत जारी किया जाए।
6 महीने से वेतन नहीं, परिवार पालना हुआ मुश्किल
प्रदर्शन में शामिल एपीओ ब्लॉक सुजानपुर, आशु बाला ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि कर्मचारियों को पिछले 6 महीनों से वेतन नहीं मिला है। आर्थिक तंगी के कारण अब परिवारों का पालन-पोषण करना और दैनिक गुजारा चलाना बेहद मुश्किल हो चुका है। कर्मचारियों का सब्र अब पूरी तरह टूट रहा है।

मांगें पूरी न होने पर संघर्ष तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द से जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे अपने इस संघर्ष और आंदोलन को और अधिक उग्र तथा तेज करेंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में स्थिति बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।








