पर्यावरण संरक्षण की ओर हाईकोर्ट का बड़ा कदम: माननीय न्यायाधीश करेंगे ‘कार-पूलिंग’, 50% स्टाफ को ‘वर्क फ्रॉम होम’

प्रदेश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था हाईकोर्ट ने अपनी कार्यप्रणाली में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव किया है। ईंधन की खपत को कम करने और पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) व्यवस्था को लागू करने के लिए मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया ने तत्काल प्रभाव से ‘मितव्ययता उपाय’ (Austerity Measures) अपनाने के निर्देश जारी किए हैं।

इस व्यवस्था के तहत हाईकोर्ट के सभी माननीय न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि वे आपस में ‘कार-पूलिंग’ व्यवस्था को बढ़ावा देंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ईंधन की बढ़ती खपत को रोकना और सरकारी संसाधनों का बेहतर व अनुकरणीय उपयोग सुनिश्चित करना है।

वैश्विक परिस्थितियों को देख लिया निर्णय
हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह कदम भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के परिपत्र (Circular) और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों व ऊर्जा संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मुख्य न्यायाधीश और सभी न्यायाधीशों ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए खुद से इस बदलाव की शुरुआत की है।

कर्मचारियों के लिए भी नई व्यवस्था: रोटेशन के आधार पर ‘वर्क फ्रॉम होम’
हाईकोर्ट की रजिस्ट्री और प्रशासनिक शाखाओं से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी नई गाइडलाइन लागू की गई है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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- 50% स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम: प्रत्येक शाखा (Branch) और सेक्शन के 50 प्रतिशत कर्मचारी सप्ताह में दो दिन घर से काम (Work from Home) कर सकेंगे।
- कामकाज नहीं होगा बाधित: आदेश में साफ किया गया है कि बाकी का 50 प्रतिशत स्टाफ कार्यालय में अनिवार्य रूप से मौजूद रहेगा, ताकि अदालती कामकाज में कोई रुकावट न आए।
- फोन पर रहना होगा एक्टिव: वर्क फ्रॉम होम कर रहे कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ड्यूटी के दौरान फोन पर पूरी तरह उपलब्ध रहेंगे और आपात स्थिति या आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत कार्यालय रिपोर्ट करना होगा।
“न्यायपालिका का यह कदम समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर संस्था की जिम्मेदारी है।” > — कानूनी विशेषज्ञ







