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“खाड़ी में छिड़ी जंग, क्या अब खाली रहेंगे किसानों के गोदाम? दुनिया भर में उर्वरक संकट की आहट!”

खाड़ी संकट: गहराया उर्वरक संकट, मक्का किसानों की बढ़ी चिंता

​खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच पिछले तीन सप्ताह से जारी तनाव ने अब वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था की चूलें हिलाना शुरू कर दिया है। युद्ध के कारण न केवल तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, बल्कि अब किसानों के लिए सबसे जरूरी ‘उर्वरक’ (Fertilizer) की कमी का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचा, तो आने वाले फसल सीजन में खाद की भारी किल्लत और कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

वैश्विक यूरिया व्यापार का मुख्य मार्ग खतरे में

​विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व (Middle East) क्षेत्र वैश्विक कृषि के लिए लाइफलाइन की तरह है। दुनिया के कुल यूरिया व्यापार का लगभग एक-तिहाई (1/3) हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। युद्ध की स्थिति में लॉजिस्टिक्स और शिपिंग रूट्स बाधित होने से खाद की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है।

अमेरिकी खेती पर सीधा प्रहार

​खास तौर पर अमेरिका के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। आंकड़ों के मुताबिक:

  • ​अमेरिका में आयात होने वाले कुल उर्वरकों का 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले कतर से आता है।
  • ​नैशनल कॉर्न ग्रोअर्स एसोसिएशन के अनुसार, अमेरिका के लगभग 5 लाख किसान मक्का की खेती करते हैं।
  • ​मक्का की फसल के लिए नाइट्रोजन उर्वरक अनिवार्य है, जिसकी कमी सीधे तौर पर पैदावार को प्रभावित कर सकती है।

व्हाइट हाउस की ‘प्लान-बी’ पर नजर

​बढ़ते संकट को देखते हुए व्हाइट हाउस सक्रिय हो गया है। अमेरिकी प्रशासन दुनिया भर में उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि उन्हें इस दिशा में कुछ सफलता भी मिली है। अमेरिका का मानना है कि हालांकि वह युद्ध जनित सभी व्यवधानों को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता, लेकिन वैकल्पिक इंतजामों के जरिए इसके प्रभाव को कम (Minimize) जरूर किया जा सकता है।

विशेषज्ञों की राय: आने वाले महीने होंगे चुनौतीपूर्ण

​कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का असर अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले महीनों में इसका प्रभाव अन्य सेक्टरों पर भी साफ दिखाई देगा। हालांकि वैश्विक स्तर पर यह उम्मीद की जा रही है कि युद्ध के बादल जल्द छंटेंगे, लेकिन वर्तमान में अनिश्चितता का माहौल बरकरार है। अगर खाद की कीमतों में इसी तरह उछाल जारी रहा, तो खाद्य सुरक्षा का संकट भी खड़ा हो सकता है।

Ami News
Author: Ami News

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