पंजाब रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल पर बड़ी कार्रवाई, अध्यक्ष बिक्रमजीत सिंह निलंबित

किलोमीटर स्कीम बस टेंडर रद्द होने पर हड़ताल: पंजाब सरकार का बड़ा एक्शन, PunBus के कई कर्मचारी सस्पेंड
जालंधर/चंडीगढ़: किलोमीटर-स्कीम बसों के टेंडर रद्द करने के विरोध में पंजाब में चल रही हड़ताल पर पंजाब सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। विभाग ने हड़ताल में शामिल पनबस (PunBus) जालंधर-1 डिपो के प्रधान बिक्रमजीत सिंह को ड्यूटी से गैर-हाजिर रहने के कारण निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इसके साथ ही, इस हड़ताल में शामिल सभी संविदा (कच्चे) कर्मचारियों को भी तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित कर दिया गया है।
ईमेल भेजकर दी गई निलंबन की जानकारी
परिवहन विभाग ने सभी संविदा कर्मचारियों को एक ईमेल भेजकर इस कार्रवाई की जानकारी दी है। ईमेल में स्पष्ट कहा गया है कि कर्मचारियों ने “गैर-कानूनी हड़ताल” में हिस्सा लेकर सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाया है।
वित्तीय नुकसान का ब्यौरा: विभाग ने बताया कि 28 नवंबर, 2025 को गैर-कानूनी हड़ताल के कारण अलग-अलग डिपो से सैकड़ों बसें नहीं चलीं।

प्रति बस घाटा: इस कारण सरकार को बस स्टेशन के खर्चों, किराए, ओवरटाइम और वेतन आदि के रूप में प्रति बस रोजाना ₹9,520 का वित्तीय नुकसान हुआ। परिणामस्वरूप, विभाग को दो दिनों में प्रति बस ₹11,939 का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा।
ड्यूटी की हानि: पत्र में कहा गया है कि 29 नवंबर को भी ड्यूटी पर गैर-हाजिर रहने के कारण प्रति बस 301 किलोमीटर की ड्यूटी छूटी। इसे विभाग और कर्मचारियों के बीच हुए समझौते की शर्त 15 का उल्लंघन माना गया है।
लोगों को हुई परेशानी
निलंबन पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पंजाब में सरकारी बसों में सफर करने वाले आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ी और उन्हें आवागमन में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

परिवहन विभाग ने 28 नवंबर को एक नोटिस जारी कर कर्मचारियों को तुरंत ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया था, लेकिन निर्देशों की अनदेखी के बाद यह सख्त कार्रवाई की गई है। वित्तीय नुकसान और गैर-कानूनी हड़ताल में हिस्सेदारी के कारण कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त/निलंबित किया जा रहा है।








