साल 2020 में 18 लाख से ज़्यादा मामले, इस साल अक्टूबर तक आंकड़ा 20.77 लाख के पार

नई दिल्ली: देश में तपेदिक यानी टीबी (Tuberculosis) के मरीज़ों की बढ़ती संख्या सरकार के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। भारत ने साल 2025 तक इस संक्रामक रोग को पूरी तरह से खत्म करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, लेकिन ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि हम अपने लक्ष्य से दूर होते जा रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, देश में टीबी के कुल मामलों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है।
साल 2020 में टीबी के मरीज़ों की कुल संख्या 18,05,670 थी।
लेकिन, इस साल (2025) अक्टूबर तक यह आंकड़ा बढ़कर 20,77,591 तक पहुँच गया है।
यह वृद्धि न केवल स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव डालती है, बल्कि 2025 के उन्मूलन लक्ष्य की सफलता पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
लक्ष्य और हक़ीक़त में बड़ा अंतर
केंद्र सरकार की ‘टीबी मुक्त भारत’ (TB Mukt Bharat) पहल का मकसद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक लक्ष्य से पाँच साल पहले ही इस बीमारी को खत्म करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते मामलों को देखते हुए, सरकार को अपनी स्क्रीनिंग, इलाज और जागरूकता की रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा।
टीबी के मरीज़ों की बढ़ती संख्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें महामारी के दौरान जांच में कमी, कुपोषण, और इलाज के बीच में छोड़ देना शामिल हैं। यह ज़रूरी है कि सरकार और आम जनता दोनों ही इस दिशा में गंभीरता से काम करें ताकि देश को इस जानलेवा बीमारी से मुक्ति मिल सके
मुख्य आंकड़े एक नज़र में
2020 में मरीज़ों की संख्या: 18,05,670
इस साल अक्टूबर तक मरीज़ों की संख्या: 20,77,591
सरकार का लक्ष्य: 2025 तक टीबी उन्मूलन
अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्य: 2030 तक टीबी उन्मूलन (WHO)








