हिमाचल प्रदेश के जलाशयों में मछली उत्पादन बढ़ाने की मुहिम: पोंग झील में 17 लाख मछली के बच्चे छोड़ने का लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने और मछुआरों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पोंग झील में मछलियों की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग ने 17 लाख मछली के बच्चे छोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
अब तक लगभग 12 लाख 96 हजार बच्चे झील में छोड़े जा चुके हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना और झील से जुड़े करीब 3600 मछुआरा परिवारों की आय को बढ़ाना है। विभाग को पूरी उम्मीद है कि इस पहल से मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
प्रदेश के पांच प्रमुख जलाशयों—पोंग डैम, गोविंद सागर, रणजीत सागर, चमेरा और कोल डैम—में उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज का संग्रहण किया जा रहा है। अकेले पोंग झील में लगभग 17 लाख कुल बीज संग्रहित किए जा रहे हैं। इसमें रोहू (सात लाख पचास हजार), मृगल (एक लाख), कतला (पाँच लाख) और ग्रास कार्प (तीन लाख पचहत्तर हजार) जैसी विभिन्न प्रजातियों के बीज शामिल हैं। कैपेसिटी और डिमांड के अनुसार ही जलाशयों में बीजों का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण सुनिश्चित किया जा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निदेशालय स्तर पर एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन करते हुए बीज के परिवहन, गुणवत्ता और वितरण पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश नित नए आयाम स्थापित कर सके और मछुआरों का भविष्य और अधिक उज्जवल हो सके।











