अवैध माइनिंग का काला खेल: बेनकाब हुआ सफेदपोश, पुलिस की कार्रवाई सिर्फ आईवाश
1 अगस्त से चल रहे अवैध माइनिंग के मास्टरमाइंड बेनकाब हो चुके हैं, और सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस अवैध खनन के पूरे खेल को कौन सा माननीय चला रहा है। दिन के उजाले और कैमरे में कैद हुआ यह सबसे बड़ा राजनीतिक संरक्षण है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई अभी तक सिर्फ आईवाश साबित हुई है। 1 अगस्त से लेकर आज तक इस नदी के हर एक पत्थर, अवैध ट्रॉली और सरेआम चल रही हर मशीन को कैमरे में कैद किया गया है। मानसून के मौसम में कानूनी माइनिंग पर पूरी तरह रोक होती है, लेकिन यहां नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सरेआम अवैध माइनिंग का खेल चल रहा है। लगातार खबरें दिखाने के बाद कई लोगों के कमेंट्स आए कि खबरें दिखाने से क्या होगा, क्योंकि यह बहुत बड़े लोगों का मामला है और इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
लेकिन आज उन बातों का जवाब देने का वक्त आ गया है, क्योंकि खबरों के दबाव में आकर पुलिस ने एक-दो बार रेड की, कुछ मशीनें और टिप्पर जरूर पकड़े, लेकिन वह सब सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम था। अगर पुलिस की कार्रवाई में सच में खौफ होता, तो अगले ही दिन दोगुनी तादाद में मशीनें लाकर माइनिंग करने की हिम्मत किसी में कैसे होती? रात के अंधेरे में खड्ड का नजारा ऐसा होता था मानो कोई बहुत बड़ा जगमगाता शहर बस गया हो, इतनी रोशनी और इतना शोर था
, लेकिन अफसोस कि माइनिंग विभाग पूरी तरह बेखबर पड़ा था और पुलिस विभाग अपने घरों में आराम से सोया हुआ था, क्योंकि डर नाम की चीज इन अवैध माइनिंग के आकारों में बची ही नहीं थी। हमारी हर एक रिपोर्ट में यही बात कही गई कि इस पूरे खेल के पीछे कोई न कोई बड़ा राजनीतिक संरक्षण है और कोई ऐसा सफेदपोश है, जिसकी वजह से पुलिस और माइनिंग विभाग के हाथ बंधे हुए हैं।
आज हमारे साथ बने रहिए, हम आपको वह चेहरा, वह व्यक्तित्व और वह सफेदपोश दिखाएंगे जिसके इशारे पर यह पूरा माइनिंग का काला खेल चल रहा है। कैमरा स्क्रीन पर पूरी तरह फोकस करें, दिन का उजाला है और खड्ड के बीचों-बीच शान से खड़ी फॉर्च्यूनर और उसके ठीक पीछे खड़ी स्कॉर्पियो साफ नजर आ रही है।
अब जरा ध्यान से इन विजुअल्स को देखिए और कमेंट सेक्शन में तुरंत लिखकर बताइए कि यह फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो किसकी है, वह बड़ा नेता, सफेदपोश और माइनिंग माफिया कौन है जो कानून को अपनी जेब में लेकर घूम रहा है?













