अमेरिका में नागरिकता रद्द करने की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू, भारतीय मूल के बलविंदर सिंह समेत 40 लोगों पर शिकंजा
अमेरिका ने आधुनिक इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी प्रक्रिया का आगाज करते हुए विभिन्न अदालतों में बड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। न्याय विभाग की इस कार्रवाई के दायरे में भारतीय मूल के बलविंदर सिंह समेत कुल 40 लोग आ गए हैं, जिन पर विदेशी एजेंट के रूप में काम करने, गैर इरादतन हत्या और गंभीर यौन अपराध जैसे संगीन आरोप दर्ज हैं। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने इसे आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी डी-नेचुरलाइजेशन प्रक्रिया करार देते हुए स्पष्ट किया है कि आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम के तहत धोखाधड़ी या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई नागरिकता को पूरी तरह से अवैध माना जाएगा।
न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के सहायक अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शूमेट ने दो टूक शब्दों में कहा कि इन तमाम लोगों ने अमेरिकी नागरिकता पाने के लिए झूठ का सहारा लिया था और प्रशासन का यह कदम अमेरिकी नागरिकता की विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की धोखाधड़ी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के तहत कैलिफोर्निया की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बलविंदर सिंह के खिलाफ मामला चलाया जा रहा है। न्याय विभाग के मुताबिक, सिंह पर फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके अमेरिका में प्रवेश पाने और नागरिकता हासिल करने का गंभीर आरोप है। रिकॉर्ड बताते हैं कि सिंह ने साल 1992 में अपने असली नाम से आव्रजन आवेदन दिया था और बाद में 2003 में एक अन्य पहचान के जरिए स्थायी निवासी का दर्जा हासिल कर लिया, जिसकी पुष्टि उसके उंगलियों के निशानों से हुई है। आगे चलकर साल 2009 में उसने इसी दूसरी फर्जी पहचान के सहारे अमेरिकी नागरिकता भी हासिल कर ली, जिस पर अब न्याय विभाग ने धोखाधड़ी और गलत जानकारी देने से जुड़े सात बड़े आरोप तय किए हैं।
इस सूची में चीन में जन्मे अमेरिकी नौसेना के पूर्व नाविक जिंचाओ वेई का मामला भी शामिल है, जिसकी नागरिकता छीनने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वेई को अगस्त 2025 में चीन को सैन्य गोपनीय जानकारियां बेचने और जासूसी की साजिश रचने के जुर्म में दोषी करार देते हुए 200 महीने की लंबी जेल की सजा सुनाई जा चुकी है और उसे नौसेना से भी बर्खास्त कर दिया गया था। न्याय विभाग की ओर से शुरू की गई इस व्यापक कार्रवाई की जद में भारत और चीन के अलावा पाकिस्तान, मेक्सिको, कंबोडिया, नेपाल और अफगानिस्तान के नागरिक भी शामिल हैं, जिन पर अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने और आव्रजन नियमों को ताक पर रखने के गंभीर मामले चल रहे हैं।











