दो निगमों की खींचतान में पिस रहा वार्ड नंबर 12, बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं लोग
पठानकोट के वार्ड नंबर 12 में हालात किसी ग्रामीण इलाके से कम नहीं हैं। विजुअल और जमीनी हकीकत यह बयां करती है कि विकास के दावों के बीच यह क्षेत्र पूरी तरह उपेक्षित है। इस वार्ड का आधा हिस्सा पठानकोट कॉरपोरेशन और आधा हिस्सा सुजानपुर कॉरपोरेशन के अंतर्गत आता है
, जिसके कारण दोनों निगमों की आपसी खींचतान और प्रशासनिक उदासीनता का खमियाजा यहां की जनता को भुगतना पड़ रहा है। सीमा विवाद के चलते यहां लंबे समय से कोई भी विकास कार्य नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।
क्षेत्र में हालात इतने बदतर हैं कि यहां न तो पक्की सड़कें हैं और न ही स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था। सीवरेज और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी यहां पूर्ण अभाव है। सड़कों के नाम पर केवल गड्ढे और उड़ती हुई धूल दिखाई देती है। स्थिति तब और नारकीय हो जाती है जब बरसात के दिनों में कीचड़ के कारण दो-पहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों का चलना दूभर हो जाता है। स्कूल और कॉलेज नजदीक होने के बावजूद छात्र-छात्राओं और बुजुर्गों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि शहर के अन्य हिस्सों की तरह इस वार्ड पर भी ध्यान दिया जाए। भारी संख्या में आबादी वाले इस क्षेत्र में जल्द से जल्द सड़क निर्माण, सीवरेज लाइन और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं ताकि नागरिकों को रोजमर्रा की समस्याओं से निजात मिल सके।












