12 घंटे में ही हवा हुई पुलिस के खौफ की हवा: नूरपुर में खनन का नंगा नाच जारी
घटना स्थल: खन्नी पंचायत (ब्राह्मणदा नाल और बिल्लां दा टाल, हिमाचल प्रदेश)
समय-तारीख: 18 सितंबर, शाम 5:20 बजे (पहली रेड के 18 घंटे बाद)
17 सितंबर को रात को गाड़ियां हुईं जब्त, और 18 और 19 को फिर से अवैध खनन का खेल शुरू! क्या 17 तारीख की रात की रेड सिर्फ मीडिया के लिए किया गया कागजी स्टंट था?
मान्यवरों, नूरपुर पुलिस, खनन विभाग और जिला प्रशासन को बहुत-बहुत बधाई! आपकी उस तथाकथित सख्त कार्रवाई का खौफ माफिया के सिर चढ़कर कुछ इस कदर बोल रहा है कि 17 सितंबर की रात को आपने कार्रवाई के नाम पर दो जेसीबी, पांच टिप्पर और एक ट्रैक्टर जब्त किए, और अगले ही दिन माफिया दोगुनी रफ्तार से नदी का सीना चीरने उतर आए। वाह क्या गजब की टाइमिंग है और क्या गजब का जीरो टॉलरेंस! न माफिया को पुलिस की वर्दी का डर है, न खनन विभाग की कार्रवाई का खौफ और न ही जिला प्रशासन की नकेल का कोई खटका।
अगर हमारी बातों में कोई कसर लगे तो स्क्रीन पर दिख रही इस तारीख और वक्त को जरा अपनी आंखों से देखिए: 18 सितंबर शाम 5:20 बजकर 20 मिनट। 17 तारीख की रात को पुलिस के रेड मारने के ठीक 18 घंटे बाद, हिमाचल प्रदेश की खन्नी पंचायत के ब्राह्मणदा नाल और बिल्लां दा टाल में एक-दो नहीं, भारी-भरकम टिपर्स की कतारें लगी हुई हैं। तब खनन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कहां सो रहे थे जब ये मशीनें वहां पे गरज रही थीं? पुलिस की दिन-रात की गश्त का ढिंढोरा कहां चला गया? यह सिर्फ कागजों में गाड़ियां जब्त करके तीनों विभागों ने अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी?
बात सिर्फ 18 तारीख तक सीमित नहीं रही, जरा आज यानी 19 सितंबर सुबह 9 बजे की यह ताजा तस्वीरें भी देख लीजिए। नदी के ठीक बीचों-बीच जेसीबी और पोकलैंड मशीनें गरज रही हैं। खुलेआम टिपर्स में अवैध सामग्री भरी जा रही है। यह दृश्य बताता है कि नूरपुर में कानून नाम की कोई चीज ही नहीं बची है। यह सिर्फ अधिकारियों की अनदेखी नहीं, यह तीनों विभागों की नाकामी की तमाम हदों को पार कर चुका एक ऐसा खेल है जो प्रशासनिक संरक्षण के बिना मुमकिन ही नहीं दिखाई देता।
अब सीधा और तीखा सवाल एसपी नूरपुर, इल्मा अफ्रोज, खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन से है: 17 सितंबर की रात को हुई कार्रवाई क्या सिर्फ खबरों को दबाने के लिए किया गया एक कागजी स्टंट थी? अगर कार्रवाई के 24 घंटे के अंदर उसी जगह पर उससे दोगुनी मशीनें चल रही हैं, तो हम इसे पुलिस की लाचारी समझें या खनन विभाग की सीधी मिलीभगत? आखिर ऐसी क्या मजबूरी या अदृश्य दबाव है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ एक रात का नाटक होता है और अगले ही दिन माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों का गला घोटते हैं?
अगर वाकई नियत साफ है, तो मैडम एसपी, खनन अधिकारी और प्रशासनिक अमला अपनी कुंभकर्णी नींद से बाहर निकले। महाराज एक-दो गाड़ियों पर खानापूर्ति वाले चालान काटने के अलावा इस बेखौफ माफिया और उसके आकाओं पर वो कठोर कार्रवाई करके दिखाएं, जिसे नदी में दोबारा मशीन उतारने में इनकी हिम्मत न हो।
तारीख, समय और ऑन-कैमरा सबूतों के साथ एएमआई न्यूज़ (AMI News) इन तीनों जिम्मेदार विभागों की खामोशी पर लगातार सवाल दागता रहेगा।













