पंजाब में पटवारियों का फूटा गुस्सा: सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, पूर्ण ‘कलम छोड़ हड़ताल’ की चेतावनी
पठानकोट / चंडीगढ़:तहसीलदार दफ्तरों में गूंजते नारों और हाथों में लहराते झंडों के बीच पंजाब सरकार के खिलाफ पटवारियों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। रेवेन्यू पटवारी यूनियन के बैनर तले एकजुट हुए दर्जनों कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। यूनियन का आरोप है कि सरकार सिर्फ कोरे वादे कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
मुख्य मांगें और कर्मचारियों का असंतोष
यूनियन के अनुसार, सरकार की उदासीनता के कारण कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- पदों की बहाली और वृद्धि: सरकार ने हाल ही में पटवारियों के पदों में कटौती कर दी है। यूनियन मांग कर रही है कि पूर्व में स्वीकृत 4,716 पदों को तुरंत बहाल किया जाए तथा काम के बढ़ते बोझ को देखते हुए इनकी संख्या बढ़ाकर 6,000 से 7,000 की जाए।
- वेतन विसंगति दूर करना: नए भर्ती हुए कर्मचारियों को शुरुआती तीन साल तक बेहद कम वेतन (लगभग ₹17,900) दिया जा रहा है, जिसमें उचित वृद्धि की जानी चाहिए।
- रिक्त पद भरना व कार्यभार कम करना: दफ्तरों में खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाए और अतिरिक्त कार्यभार का बोझ कम किया जाए।
आम जनता के काम हो सकते हैं प्रभावित
यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। ऐसी स्थिति में जमीन की रजिस्ट्री, इंतकाल और आम जनता से जुड़े तमाम जरूरी सरकारी काम ठप हो जाएंगे।
विरोध प्रदर्शन और आगे की रणनीति
सरकार के साथ कई दौर की बैठकों के बाद भी कोई ठोस परिणाम न निकलने के कारण पटवारियों ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं:
- तहसील और जिला स्तर पर लगातार धरने-प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
- विरोध स्वरूप ‘लाल लकीर’ का काम पूरी तरह बंद रखा गया है।
- राशन कार्ड की घर-घर जाकर होने वाली वेरिफिकेशन का कार्य रोक दिया गया है, केवल जमीन से जुड़ी वेरिफिकेशन ही की जा रही है।
- चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पूरे पंजाब में ‘कलम छोड़ हड़ताल’ की जाएगी।











