नूरपुर क्षेत्र में अवैध खनन: वीडियो सामने आने के बावजूद प्रशासन और खनन विभाग खामोश

बिल्ला दा नाल में धड़ल्ले से जारी है बजरी के पत्थरों का अवैध कारोबार
नूरपुर (हिमाचल प्रदेश):हिमाचल प्रदेश के नूरपुर उपमंडल के अंतर्गत आने वाली खन्नी पंचायत के बिल्ला दा नाल क्षेत्र में अवैध खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। 14 सितंबर को एएमआई न्यूज़ द्वारा प्रमुखता से उठाए गए खुलासे और दिखाए गए ताजा विजुअल्स के बाद भी धरातल पर अवैध माइनिंग के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। आलम यह है कि क्षेत्र में बजरी और पत्थरों के बड़े-बड़े ढेर आज भी जस के तस बरकरार हैं।
प्रशासन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
ताजा विजुअल्स में नदी क्षेत्र से निकाली गई सामग्री और बाहर लगाए गए बजरी-पत्थरों के विशाल ढेर साफ देखे जा सकते हैं। इस गंभीर मामले पर सीधा सवाल खनन विभाग और नूरपुर पुलिस प्रशासन से है:
- वैधता पर संशय: यदि यह ढेर पूरी तरह वैध हैं, तो प्रशासन जनता के सामने इनके वैध दस्तावेज और अनुमतियां स्पष्ट क्यों नहीं करता?
- कार्रवाई में देरी क्यों?: यदि इनका कोई वैध स्त्रोत नहीं है, तो इन्हें तुरंत जब्त करके जांच शुरू क्यों नहीं की गई?
- जिम्मेदारी किसकी?: यह सामग्री किसने निकाली, किसकी मशीनें व टिप्पर यहां दौड़े और यह अवैध सामग्री कहां खपाई जा रही है—इन सवालों के जवाब देने से विभाग कतरा रहा है।
पहले हो चुकी सख्त कार्रवाई, तो इस बार चुप्पी क्यों?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी नूरपुर पुलिस ने इससे पहले अवैध खनन के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए एफआईआर दर्ज की थीं और जेसीबी, पोकलेन तथा टिप्पर तक जब्त किए थे। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब पूर्व में सख्त कार्रवाई की नजीर मौजूद है, तो बल्ला नटाल क्षेत्र में प्रशासन नरम रुख क्यों अपना रहा है?
बार-बार खबरें प्रसारित होने के बाद भी क्या इस इलाके में रात की पेट्रोलिंग बढ़ाई गई? क्या रास्तों पर नाकाबंदी की गई और संदिग्घ टिप्परों के नंबरों की जांच हुई?
इन तमामसवालों पर प्रशासन की चुप्पी कई बड़े इशारे कर रही है।
एसपी नूरपुर और पहरेदारों की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे प्रकरण पर एसपी नूरपुर (इल्मा अफरोज़) की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। एएमआई न्यूज़ द्वारा लगातार मामले की अपडेट्स भेजने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया है। साथ ही, उन स्थानीय पहरेदारों और चौकीदारों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिनकी आंखों के सामने यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
जनता का सवाल: क्या विभाग इस मामले को गंभीरता से लेगा या फिर इस खामोशी के पीछे कोई अन्य वजह है? नूरपुर की जनता अब प्रशासन से ठोस कार्रवाई और स्पष्ट जवाब की उम्मीद कर रही है।












