डमटाल में अवैध खनन का नंगा नाच: प्रशासन बना मूक दर्शक, रात के अंधेरे में चल रही मशीनें
दिन तो छोड़िए, रात के अंधेरे में भी डमटाल, कंडवाल और इंदौरा क्षेत्रों में खनन माफिया की मशीनें ऐसे चमकती हैं, मानो इलाके में कोई जागरण चल रहा हो। डमटाल के रामगोपाल मंदिर की सरकारी जमीन पर अवैध खनन का यह काला खेल धड़ल्ले से जारी है। दिन के उजाले में तो यह कारोबार चलता ही है, लेकिन रात 12 बजे के बाद इसका असली और खौफनाक नजारा देखने को मिलता है।
एसपी और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
इलाके की जनता को एसपी नूरपुर, इल्मा अफरोज से बहुत उम्मीदें थीं कि वह इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह से नकेल कसेंगी। लेकिन ब्राह्मण दा नाल, बिल्ला दा टाल और रामगोपाल मंदिर जैसे इलाकों के मौजूदा हालात देखकर लगता है कि पुलिस और प्रशासन महज एक ‘मूक दर्शक’ बनकर रह गए हैं। मानसून में खनन पर प्रतिबंध होने के बावजूद, ऐसा प्रतीत होता है कि इन माफियाओं को चोरी-छिपे खनन करने का कोई ‘स्पेशल लाइसेंस’ दे दिया गया है।
मामले के मुख्य और चिंताजनक पहलू:
- मिलीभगत या राजनीतिक दबाव: यह एक बड़ा सवाल है कि क्या इन खनन माफियाओं को किसी रसूखदार की शह मिली हुई है? या फिर यह किसी गहरी मिलीभगत का नतीजा है जिसके चलते पुलिस और माइनिंग विभाग के हाथ बंधे हुए हैं?
- अधिकारियों की चुप्पी: महीनों से जारी इस खुले उल्लंघन पर माइनिंग विभाग, पुलिस और नागरिक प्रशासन की निरंतर चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
- एनजीटी (NGT) का रुख करने की चेतावनी: यदि जल्द ही इस मामले में कोई कड़ी और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो ‘एएमआई न्यूज़’ (AMI News) द्वारा इस मुद्दे को सीधे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के समक्ष उठाया जाएगा।
एसपी नूरपुर इल्मा अफरोज और डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा से यह सीधी गुजारिश है कि इस मामले का तुरंत और कड़ा संज्ञान लिया जाए, अन्यथा मजबूरन एनजीटी का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।












