वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

भारत के खिलाफ नई हाई-टेक आतंकी साजिश: बहावलपुर में ड्रोन ट्रेनिंग और वर्चुअल हैंडलर्स का जाल

भारत के खिलाफ नई हाई-टेक आतंकी साजिश: बहावलपुर में ड्रोन ट्रेनिंग और वर्चुअल हैंडलर्स का जाल

​पाकिस्तान की जमीन से भारत के खिलाफ रची जा रही साजिशों ने अब एक बेहद खतरनाक तकनीकी रूप ले लिया है। खुफिया इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों ने भारत में बड़े हमलों को अंजाम देने के लिए अपनी रणनीति बदल दी है। बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एक बार फिर हलचल तेज होने के संकेत मिले हैं, जबकि सुरक्षा एजेंसियां ‘ड्रोन स्वार्म’ यानी ड्रोन के झुंड और क्रिप्टो फंडिंग के नए खतरों से निपटने के लिए अलर्ट पर हैं।

​बहावलपुर में ‘ड्रोन सेफ हाउस’ होने का शक

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय ‘मरकज सुभान अल्लाह’ से जुड़े कॉम्प्लेक्स में ड्रोन गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग के इंतजाम किए गए हैं। यहां कमर्शियल ड्रोन के संचालन, उनकी निगरानी और उनके जरिए संदिग्ध सामान या विस्फोटक पहुंचाने का प्रशिक्षण दिए जाने का अंदेशा है। इसके अलावा, नियंत्रण रेखा (LoC) के आसपास नए छोटे आतंकी ठिकाने (लॉन्च पैड) बनाए जाने की सूचना भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा रही है।

​‘ड्रोन स्वार्म अटैक’ और नार्को-ड्रोन की चुनौती

सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब अकेले ड्रोन की जगह एक साथ बड़ी संख्या में ड्रोन भेजने यानी ‘ड्रोन स्वार्म’ की नई चुनौती खड़ी हो गई है। एक साथ कई ड्रोन उड़ने से सुरक्षा तंत्र के सामने एक ही समय में कई हवाई निशानों की पहचान और निगरानी करने में मुश्किल आती है। पंजाब के अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर और फिरोजपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में पहले से ही ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ और हथियार भेजने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनका इस्तेमाल अब आतंकी गतिविधियों के लिए भी किए जाने का अंदेशा है।

​वर्चुअल हैंडलर और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल

आतंकी नेटवर्क ने अपने संचार के तरीकों में भी बड़ा बदलाव किया है। जांच एजेंसियों की नजर टेलीग्राम, सिग्नल, थ्रिमा और सेशन जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर है। विदेशी धरती पर बैठे ‘वर्चुअल हैंडलर’ इन सुरक्षित डिजिटल माध्यमों से भारत में मौजूद अपने संपर्कों को निर्देश देकर स्थानीय स्तर पर स्लीपर सेल और मॉड्यूल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।

​सोशल मीडिया पर प्रोपेगैंडा और क्रिप्टो फंडिंग

दैनिक गतिविधियों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) और ‘कश्मीर टाइगर्स’ जैसे संगठनों से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क युवाओं को प्रभावित करने और भड़काऊ सामग्री फैलाने में लगे हैं। इसके साथ ही, आतंकी फंडिंग के लिए पारंपरिक हवाला के अलावा अब संदिग्ध क्रिप्टो लेनदेन, डिजिटल वॉलेट और विदेशों से आने वाली संदिग्ध रकम की कड़ियों को भी बारीकी से टटोला जा रहा है।

​जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब और देश की राजधानी दिल्ली तक की सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार से रची जा रही इन तमाम डिजिटल और तकनीकी साजिशों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

Ami News
Author: Ami News

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!