वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

AMI News: पठानकोट-मंडी NH-154 पर 520 मीटर लंबे फोरलेन ब्रिज का निर्माण अंतिम चरण में, वेल फाउंडेशन तकनीक से मिलेगी बाढ़ से सुरक्षा

चक्की दरिया पर ₹45 करोड़ से बन रहा 520 मीटर लंबा फोरलेन ब्रिज, दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य

​पठानकोट/हरियाल:पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमाओं को जोड़ने वाले सामरिक एवं पर्यटन दृष्टि से अति महत्वपूर्ण ‘पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे’ (NH-154) पर स्थित चक्की दरिया पर बन रहे नए फोरलेन ब्रिज का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और निर्माण कंपनी आईआरबी (IRB) द्वारा ₹45 करोड़ की अनुमानित लागत से तैयार किए जा रहे इस 520 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य बेहद तेज गति से चलाया जा रहा है।

​पुल के कुल 17 पिलरों में से 14 पिलर और ऊपर की स्लैब ढालने का काम पूरा कर लिया गया है। पठानकोट की ओर बचे हुए महज 3 स्पैन का काम मानसून के बाद तेजी से पूरा किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2026 तक इस नए पुल को वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।

​वेल फाउंडेशन तकनीक: अब बाढ़ के बहाव से नहीं डोलेगा पुल

अगस्त 2022 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा, चक्की दरिया में अवैध खनन व तेज बहाव के कारण पुराना नेशनल हाईवे ब्रिज और रेलवे ब्रिज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके कारण महीनों तक हाईवे बंद रहा और यात्रियों को भदरोआ-कंदवाल के रास्ते 15 से 20 किलोमीटर का जोखिम भरा अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नए पुल का निर्माण ‘वेल फाउंडेशन’ (Well Foundation) तकनीक से किया जा रहा है। इसके तहत पिलरों की नींव दरिया के धरातल से लगभग 23 मीटर की गहराई तक रखी गई है। इस एडवांस्ड सिविल इंजीनियरिंग तकनीक के कारण भविष्य में दरिया में आने वाली भीषण बाढ़ या तेज जलभराव का पुल के पिलरों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

​दोहरी ट्रैफिक व्यवस्था से खत्म होगा जाम का झाम

नया पुल शुरू होते ही चक्की दरिया पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से स्थायी मुक्ति मिल जाएगी। NHAI की योजना के अनुसार:

  • ​पंजाब में एंट्री: हिमाचल प्रदेश की ओर से पठानकोट और पंजाब में प्रवेश करने वाले सभी वाहन इस नए फोरलेन ब्रिज का उपयोग करेंगे।
  • ​हिमाचल की ओर रवानगी: पंजाब से कांगड़ा, धर्मशाला, कुल्लू और मनाली की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को वर्तमान में चालू चक्की सड़क पुल से गुजारा जाएगा।
  • ​लाभ: इस ‘वन-वे’ और दोहरी लेन व्यवस्था से दोनों राज्यों के बीच वाहनों की रफ्तार बढ़ेगी, ईंधन की बचत होगी और यात्रा के समय में भारी कमी आएगी।

​रोजाना 20 से 25 हजार वाहन करते हैं क्रॉस

NHAI के स्थानीय प्रोजेक्ट डायरेक्टर (PD) कार्यालय, निर्माण कंपनी IRB और पठानकोट ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक ट्रैफिक सर्वे व टोल डेटा के अनुसार:

  • ​सामान्य दिनों में ट्रैफिक: इस चक्की कॉरिडोर से प्रतिदिन 20 हजार से 25 हजार वाहन (कारें, निजी बसें, राज्य परिवहन बसें व हैवी मालवाहक ट्रक) गुजरते हैं।
  • ​पर्यटन सीजन में लोड: समर सीजन, न्यू ईयर और वीकेंड्स के दौरान कुल्लू-मनाली, धर्मशाला, मैक्लोडगंज, डलहौजी और ज्वालाजी जाने वाले पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण दैनिक वाहनों की संख्या बढ़कर 35 हजार से 40 हजार तक पहुंच जाती है।
  • ​यात्रियों की संख्या: प्रतिदिन औसतन 80 हजार से 1 लाख यात्री इस अंतरराज्यीय सीमा को पार करते हैं, जिन्हें दिसंबर के बाद बिना किसी रुकावट के सुगम सफर की सुविधा मिलेगी।

​पंजाब और हिमाचल के इन जिलों की बदलेगी तस्वीर

  • ​पंजाब के जिले: पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और होशियारपुर जिले के व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और दैनिक यात्रियों को सीधी राहत मिलेगी।
  • ​हिमाचल के जिले: कांगड़ा (धर्मशाला, पालमपुर, नूरपुर), कुल्लू, मंडी, चंबा, लाहौल-स्पीति और ऊना के लोगों को राहत मिलेगी।
  • ​सामरिक व रक्षा महत्व: यह मार्ग भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। लेह-लद्दाख और कारगिल सीमाओं तक रसद व सैन्य वाहनों की त्वरित आवाजाही के लिए इसी हाईवे का इस्तेमाल होता है।
Ami News
Author: Ami News

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!