NH-44 पर NHAI की बड़ी लापरवाही: तंग और क्षतिग्रस्त पुलिया पर मंडरा रहा बड़े हादसे का खतरा
सुजानपुर/पठानकोट: नेशनल हाईवे 44 (NH-44), जो देश को उत्तर से दक्षिण तक जोड़ता है और रणनीतिक रूप से जम्मू-कश्मीर को पूरे भारत से जोड़ता है, इस समय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की घोर उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। सुजानपुर से पठानकोट की ओर बढ़ते समय हाईवे पर बनी क्षतिग्रस्त और तंग पुलिया रोजाना लाखों यात्रियों की जान जोखिम में डाल रही है।
सुरक्षा के कड़े मानकों की अनदेखी
सुजानपुर से पठानकोट मार्ग पर दो छोटी पुलिया आती हैं। इनमें से पहली पुलिया ठीक स्थिति में है, लेकिन दूसरी पुलिया पर पहुंचते ही NHAI की भारी लापरवाही सामने आती है:
- टूटी हुई सुरक्षा दीवार: हादसों के कारण पुलिया की सुरक्षा दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
- गलत जगह लगा क्रैश बैरियर: सुरक्षा दीवार के ठीक सटकर लगने वाले ‘क्रैश बैरियर’ को दीवार से काफी पीछे हटाकर लगा दिया गया है।
- दिखावटी रिफ्लेक्टर: बैरियर सही जगह पर न होने के कारण उस पर लगाए गए रिफ्लेक्टरों का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।
चार-लेन का अचानक दो-लेन में बदलना (बॉटलनेक)
कहने को यह मार्ग चार-लेन (4-Lane) का नेशनल हाईवे है, लेकिन इस पुलिया पर पहुँचते ही सड़क अचानक सिमटकर दो-लेन (2-Lane) की रह जाती है।
बड़ा सवाल: क्या निर्माण के समय संबंधित विभाग और इंजीनियर गहरी नींद में थे? इतने महत्वपूर्ण राजमार्ग पर इस बड़े ‘बॉटलनेक’ (Bottle-neck) को अनदेखा कैसे कर दिया गया?
साइन बोर्ड और चेतावनी चिह्नों का अभाव
इस मार्ग की सबसे खतरनाक बात यह है कि तेज रफ्तार में आ रहे वाहनों को सचेत करने के लिए आगे मार्ग तंग होने या किसी खतरे का एक भी साइन बोर्ड नहीं लगाया गया है।
100 किमी/घंटे की रफ्तार से आ रहे वाहन चालकों को ऐन मौके पर इस तंग व क्षतिग्रस्त रास्ते का अहसास होता है, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर गंभीर हादसों का शिकार हो सकते हैं।
जनता का सवाल: हादसे के बाद ही जागेगा प्रशासन?
यह न केवल NHAI की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि इस हाईवे से गुजरने वाले हर नागरिक की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है।
स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने मांग की है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना, समय रहते इस टूटी हुई पुलिया और बेजगह लगे क्रैश बैरियर को दुरुस्त किया जाए और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।














