मणिमहेश यात्रा 2026: सुरक्षा और सुगम मार्ग पर प्रशासन का जोर
पैदल मार्ग दुरुस्त करने में जुटा प्रशासन, DC मुकेश रेपसवाल ने धनछो और गौरीकुंड तक किया निरीक्षण
जितेंद्र मेहरा, चंबा: आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में शुमार भगवान शिव की पवित्र मणिमहेश यात्रा को लेकर चंबा प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। वर्ष 2025 के मानसून के दौरान भारी बारिश से क्षतिग्रस्त हुए पैदल मार्ग को इस बार सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है।
तैयारियों का जायजा लेने के लिए चंबा के उपायुक्त (DC) मुकेश रेपसवाल ने खुद भरमौर प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ भरमौर से हडसर, धनछो और माता गौरीकुंड तक के पैदल मार्ग का विस्तृत निरीक्षण किया।
वैकल्पिक मार्ग का 70 से 80 फीसदी काम पूरा
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने पाया कि पुराने मार्ग के कई हिस्से अभी भी क्षतिग्रस्त हैं और कई स्थानों पर रास्ता संकरा तथा अत्यधिक ढलानदार है। मिट्टी ज्यादा होने के कारण बारिश में फिसलन का खतरा बना रहता है।
उपायुक्त मुकेश रेपसवाल का वक्तव्य: > “लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाए जा रहे वैकल्पिक मार्ग का लगभग 70 से 80 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। शेष कनेक्टिविटी का काम भी तेजी से निपटाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधाओं और आपदा प्रबंधन के सभी इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।”
बीते वर्ष की तबाही से सबक, समय रहते सतर्कता
हिमालय की गोद में स्थित पवित्र मणिमहेश कैलाश की यात्रा हर साल लाखों शिव भक्तों की आस्था का केंद्र बनती है। बीते वर्ष (2025) मानसून के दौरान हडसर से धनछो के बीच का मुख्य मार्ग भारी बारिश के कारण पूरी तरह तबाह हो गया था। इसी से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन ने समय रहते वैकल्पिक रास्तों और मरम्मत कार्यों में तेजी ला दी है।
जिला प्रशासन का दावा है कि इस बार की मणिमहेश यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले ये सभी निर्माण व सुरक्षा कार्य समय पर पूरे हो पाते हैं या नहीं।













