मलोट-अबोहर रूट पर मई से दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें, इंजन बदलने का झंझट होगा खत्म

मलोट/बठिंडा: मलोट और आसपास के क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर है। बठिंडा-श्रीगंगानगर रेल मार्ग पर जल्द ही डीजल इंजनों का युग समाप्त होने जा रहा है। मई महीने से इस पूरे ट्रैक पर इलेक्ट्रिक इंजनों वाली रेलगाड़ियां पूरी रफ्तार के साथ दौड़ने लगेंगी।
ट्रायल रहा सफल, अब बिजली आपूर्ति की बाधा भी होगी दूर
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस सेक्शन पर इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण) का काम काफी पहले ही पूरा कर लिया गया था और विभाग द्वारा किए गए ट्रायल भी पूरी तरह सफल रहे हैं। हालांकि, तकनीकी रूप से अबोहर से श्रीगंगानगर के बीच बिजली की पर्याप्त आपूर्ति (Power Supply) न हो पाना एक बड़ी बाधा बनी हुई थी। इसी कारण अब तक इस रूट पर इलेक्ट्रिक इंजनों का नियमित संचालन शुरू नहीं हो पा रहा था।

बल्लूआना सब स्टेशन बनेगा गेम-चेंजर
इस समस्या के समाधान के लिए बल्लूआना में ‘ट्रैक्शन सब स्टेशन’ (TSS) का निर्माण किया जा रहा है, जो अब अपने अंतिम चरण में है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक:
- यह सब स्टेशन अप्रैल के अंत तक चालू कर दिया जाएगा।
- इसके शुरू होते ही पूरे रेल खंड को निर्बाध और पर्याप्त बिजली मिलने लगेगी।
- बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होते ही मई महीने में इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का आवागमन शुरू हो जाएगा।

यात्रियों को क्या होगा बड़ा फायदा?
वर्तमान में इस रूट से गुजरने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों को बठिंडा स्टेशन पर इंजन बदलना पड़ता है। इलेक्ट्रिक से डीजल इंजन (या इसके विपरीत) बदलने की इस प्रक्रिया में 30 से 45 मिनट का अतिरिक्त समय बर्बाद होता है।
“इलेक्ट्रिक इंजन शुरू होने से न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि बठिंडा में इंजन बदलने की समस्या भी समाप्त हो जाएगी। इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और यात्रा अधिक सुगम व प्रदूषण मुक्त होगी।”

इन शहरों को मिलेगा सीधा लाभ:
मलोट, अबोहर, बल्लूआना और श्रीगंगानगर के हजारों दैनिक यात्रियों को इस नई सुविधा से सीधा लाभ मिलेगा। अब यह रूट सीधे तौर पर देश के अन्य विद्युतीकृत रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे भविष्य में नई सुपरफास्ट ट्रेनें चलने की राह भी आसान होगी।








